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Sunday, 8 November 2026
खंडवा

नर्मदा जयंती पर ओंकारेश्‍वर में “निर्झरणी महोत्‍सव”नृत्‍यनाटिका एवं निमाड़ी लोकगायन के कार्यक्रम आयोजित किया गये

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पावनसिटी खंडवा
खंडवा – मध्‍यप्रदेश शासन के संस्‍कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन खण्‍डवा के सहयोग से नर्मदा जयंती के अवसर पर रविवार शाम को ओंकारेश्‍वर के नागरघाट पर “निर्झरणी महोत्‍सव” का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्‍या में दर्शकों के साथ साथ गणमान्‍य अतिथि भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्‍ज्‍वलन के साथ माँ नर्मदा की आरती कर किया गया। तत्‍पश्‍चात प्रदेश व देश के सुप्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी सांस्‍कृतिक प्रस्‍तुतियों से जीवनदीयिनी की महिमा का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर पहली प्रस्‍तुति नर्मदा केन्द्रित नृत्‍यनाटिका की रही, जिसे इंदौर की सुश्री कविता तिवारी एवं उनके दल ने प्रस्‍तुत किया। उन्‍होंने अपनी प्रस्‍तुति में नर्मदा जी की उत्पत्ति, उनके प्रेम और उनकी पवित्रता की कहानी को दिखाया। जिसमें नर्मदा जी को शिव जी ने आशीर्वाद दिया कि वे सदानीरा रहें और लोगों की प्यास बुझाती रहें। नर्मदा जी ने आशीर्वाद माँगा कि “हे भगवान! मेरे तल पर पाए जाने वाले सभी कंकड़ पत्थरों में आपका वास हो।” इस नृत्य नाटिका में नर्मदा जी की कहानी के साथ-साथ तराना, नृत्य संगीत, नर्मदा अष्टकम आदि की सुंदर और भावपूर्ण नृत्य की प्रस्तुतियाँ भी दी गईं।
अगली प्रस्‍तुति खरगोन के  शिवभाई गुप्‍ता एवं उनके दल की निमाड़ी लोकगायन की रही। उन्‍होंने सर्वप्रथम “राज कर रे ओंकार, नर्मदा म राज कर रे ओंकार….” गीत प्रस्‍तुत किया।
इसके बाद “कलिमल हरनी मंगल करनी देवा नर्मदा माई हो”, और “ओंकार जी का मेला म जावंगा माँ रेवा का दर्शन पावांगा” जैसे गीतों के माध्‍यम से माँ नर्मदा की महिमा और स्‍तुति प्रस्‍तुत की।
अंतिम प्रस्‍तुति इंदौर के  अनमोल जैन एवं साथियों के भक्ति गायन की रही, जिसमें उन्होंने आदि शंकराचार्य रचित “नर्मदाष्‍टकम” का गायन किया। अंत में उन्‍होंने “शिव कैलाशों के वासी….” भजन प्रस्‍तुत किया। उनके साथ ऑक्‍टोपैड पर  आदेश हंसवाल, कीबोर्ड एवं सिंथसाइजर पर  चेतन शर्मा, तबला पर  पियूष खोजे एवं ढोलक पर  रवि राठौर ने साथ दिया।

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