सुबह से ही आज मौसम कुछ ज़्यादा सुहाना लग रहा था छोटे हो या बड़े सब के चेहरे ख़ुशियों से खिले खिले नजर आ रहे थे । मौसम मे हल्की हल्की ठंडक फैली हुई थी सुबह से ही  रिमझिम रिमझिम बारिश की फुहारे बरस रही थी। जो धरती को श्वर्ग सा सुन्दर बना रही थी ।

आज चारो तरफ ख़ुशियों की बहारे ही नज़र आ रही थी हो भी क्यो ना आज 15 अगस्त का दिन है।
शर्मा जी अब बहुत बुजुर्ग हो गये थे उनसे अब ठीक से चला भी नहीं जाता था । फिर भी अपने देश की आज़ादी की खुशियाँ मानने के लिए उतने ही उत्सुकता से तैयार हो रहे थे जैसे जवानी के दिनों मे होते थे ।
उस वक्त वो एक गॉवर्मेँट स्कूल में टीचर थे। छोटा सा स्कूल था । लेकिन अपने देश की आजादी का जश्न मानने के लिए शर्मा जी बच्चों के साथ मिलकर बहुत तैयारी करते अगस्त की शुरुआत से ही शर्मा जी बच्चो को संस्कृततिक कार्यक्रम की तैयारी कराते।
वो खुद बाजार जाकर रंग बिरगे ताव के पेपर लाते फिर बच्चों को ताव के पेपर से रंग बिरंगी झालर बनाना सीखते । बच्चे बहुत खुशी के साथ रंग बिरंगी झालर बनाते ताकि 15 अगस्त के दिन अपने स्कूल को सजा सके ।
झालर बनाते वक्त शर्मा जी बच्चों  को अपने देश के स्वतंत्रता सेनानी की वीरता की कहानी सुनाते बच्चो को बताते अपनी भारत माता को गुलामी की जंजीरों से आजादी दिलाने के लिए लाखों लोगों ने कैसे हसते मुस्कुराते अपना सब कुछ निछावर कर दिया था।
और जिस दिन 15 अगस्त का दिन आता बच्चे बहुत उत्सुकता के साथ अपने स्कूल को दुल्हान की तरहा सजाते सुबह सुबह प्रभात के समय उठ कर बच्चे रंग बिरंगे फुल इखठ्ठा करना शुरु कर देते बच्चों को जिस घर से उम्मीद होती के फुल मिल जाएगे वहा सुबह सुबह ही पहुँच जाते ।
आज भी 15 अगस्त की सुहानी सुबह है शर्मा जी पुरानी सुनहेरी यादों मे खोये हुए धीरे धीरे अपने उसी स्कूल की तरफ कदम बढ़ा रहे है दिल में खुशी आज भी उतनी हीं है बस आज वो उस स्कूल में चीफ़ गेस्ट बनकर तिरंगा फहराने जा रहे है।
वो थोड़ी दूर ही चले थे उनके एक पुराने स्टूडेंट विवेक ने उन्हे देखा उन्हे आदर से नमस्तें की और 15 अगस्त की बधाई देकर हाल चाल पूछा। शर्मा जी ने मुस्कुरा कर जबाब दिया। और जब शर्मा जी ने विवेक को बताया वो अपने स्कूल जा रहे है विवेक सहर्स उन्हे स्कूल तक छोड़ने को तैयार हो गया। शर्मा जी बहुत खुश थे कुछ ही पालो मे वो स्कूल पहुंच गये।
शर्मा जी को छोड़ने के बाद विवेक के कदम भी वही थम से गये और वो अपनी बचपन की यादों में खोये हुए वही रुक गया। और दूर खड़े होकर उन खुशियों के पलो को अपने अंदर तक उतरते हुए महसूस करने लगा।
आज फिर विवेक के चेहरे पर बचपन वाली मुस्कान छाई हुई थी। उसके दिल को इतना ज़्यादा सुकून मिल रहा था जैसे दुनिया की सारी खुशियाँ इस एक पल मे समा गई हो। आज की भगंभग भरी ज़िन्दगी में ये वही खुशियाँ थी जिसको वो सालों से तलाश कर रहा था। आज वो खुशियाँ उसके दमन को भर चुकी थी।
वो यादों में खोया हुआ था वक्त कब फंख लगा कर नई यादों में सिमट गया उसे पता ही नहीं चला। किसी ने आकर उसके हाथ में एक मोती चूर का लाड्डू देकर उसकी यादों से बहार ले आया। वो आज भी अपने हाथ मे मोती चूर का लाड्डू देख कर छोटे बच्चे की तरह मुस्कुरा रहा था।
इतने मे शर्मा जी ने आकर कहा बेटा तुम अभी गये नही नहीं सर आपका ही इंतजार कर रहा था आपकों घर छोड़ना होगा ना। अरे बेटा तुम चले जाते मै आ जाता नहीं सर आज एक बार फिर आपकी वजह से मेरी ज़िन्दगी उन ख़ुशियों की बहारो से भर गई है जिसकी तलास में कहा नहीं भटका था। फिर शर्मा सर ने विवेक को एक छोटा सा तिरंगा दिए जिसे उसने चूम कर अपने सीने लगा लिया।

सैयद शबाना अली

हरदा मध्य प्रदेश

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