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Sunday, 8 November 2026
कहांनियां

Story : कीमती सामान

3 min read
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वक़्त के साथ साथ क़भी क़भी पुरानी यादे भी साथ छोड़ने लगती है। आलोक जी अपने रुम में ड्रेसिग टेबल के पास उदास खड़े है। उनकी आँखो से लगातार आसु झलक रहें हैं। एक अजीब सी कसमाकस मे है वो कभी उस ड्रेसिग टेबल को प्यार से छूते है तो कभी अपनी आँखो के आसु  पोछते है।

इतने मे सौरभ वहा आता है बाबू ज़ी क्या अपने नये घर मे चलने की तैयारी कर ली है। सौरभ को सामने देख कर अचानक आलोक ज़ी की दिल की बात ज़ुबान पर आ गई। बेटा क्या में इस ड्रेसिग टेबल को अपने साथ नये घर मे ले जा सकता हू। तेरी माँ की यादें जुड़ी है इससे आज भी मुझें उसका हसता मुस्कुराता चेहरा इसमें नजर आता है।

नहीं बाबू जी आपकों मालूम है ये सब पहलें ही डिसाइड हो गया था हम नये घर मे पुराना कोई सामान नहीं लेकर जाएंगे । अलोक जी मन मार कर ख़ामोश रह गये कुछ नही कहा और सौरभ के साथ नये घर मे ख़ाली हाथ चले गये। लेकिन नये घर मे उनका दिल नही लग रहा था। पुरानी यादे बार बार उन्हें तङपा रही थी।

वक़्त युही गुजरता जा रहा था शाम के खाने के वक़्त आलोक जी उदास बैठे खाना खा रहे थे। उनकी बहू सरला ने कहा बाबू जी माँ के गहनों वाला संदूक आप मुझे दे दीजिए मै उसे सभाल कर तीजोरी मे रख देती हू। आप तो जानते है सोने का भाब असमान छू रहा है कितने क़ीमती हैं वो गहने ।

आलोक जी ने हेरानी से सौरभ और सरला की तरफ देखा और कहा बेटा अपने ही तो कहा था हम नये घर मे कुछ भी पुराना सामान नही ले जाएंगे इसलिए मैने तुम्हारी माँ के सारे सामान के साथ वो गहने भी पुराने घर मे ही छोड़ आया हू।

बाबुजी आप जानते है आप क्या कह रहे है अपने इतने क़ीमती गहने वही छोड़ दिये । हा बेटा मेरे लिए तो तेरी माँ का हर सामान क़ीमती हैं।
बाबू जी आप हमे अपने रूम की चाभी दीजिए सौरभ सरला आलोक जी से चाभी लेकर पुराने घर गये।

आलोक जी दोनो को हैरानी से देखने लगे उनकी आँखो में अभी भी आसु थे। उन्होंने आँखे बंद कर ली। आँखे बंद करते ही ड्रेसिग टेबल के आईने मे उन्हे अपनी पत्नी का वही हसता मुस्कुराता चहरा नज़र आने लगा और आलोक जी की सांसे वही थम गई ।

लेखिका सैयद शबाना अली
हरदा मध्यप्रदेश

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