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Sunday, 8 November 2026
कहांनियां

Story : चांद की तन्हाई 

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कहानी

चांद की तन्हाई 

 हमारे जमाने में चांद के पास बहुत सारे उससे  प्यार करने वाले दोस्त होते थे। जो चांद को चंदा मामा चंदा मामा पुकारतें नहीं थकतें थे। कोई अपने घर के आँगन मे बैठकर चांद से बाते करते तो कोई अपने घर के झरोखें से चांद से बाते करते थे चांद उनकी बाते सुनकर मंद मंद मुस्कुराता था अपने नन्हें मुन्हे दोस्तों की मिठी मिठी प्यारी प्यारी बाते सुनकर खुश होता और हमेशा हसता मुस्कुराता रहता था……

बारिश् का सुहाना मौसम है। आसमान पर काले काले बादल छाये हैं। ठंडी ठंडी हवा भी चल रही है जो मौसम को और भी ज़्यादा ख़ुशनुमा बना रही थी। इस ख़ुशनुमा मौसम मे सब से ज़्यादा हंसी लग रहा था आसमान मे बादलो के साथ लुका छुपी करता हुआ चांद।
आज फुल मुन वाली नाईट है इसलिए चांद अपने पूरे शबाव मे था जरा सी झलक बादल से निकलती पुरा जहा रौशन हो जाता। सारे जहा को रौशन करने बाला चांद आज तन्हा था । बादलो की लुका छुपी मे उसके साथी सितारे कही खो गये थे।
माधव अपने घर के आँगन में चार पाई पर बैठा चांद को देख रहा था। इतने मे वहा उसकी छोटी सी पौती राधिका ने आकर कहा दादा जी क्या कर रहे हैं आप ?
बेटा मै चांद को देख रहा हू देखो कितना सुंदर लग रहा हैं आज का चांद। हा दादा जी चांद आज बहुत सुंदर लग रहा हैं।
जानती हो बेटा आज मै चांद को देखकर क्या सोच रहा हूं ? क्या दादा जी? चांद अब कितना तन्हा हो गया है। हमारे जमाने में वो इतना तन्हा नहीं था।
लेकिन दादा जी आप ऐसा क्यो सोच रहे है आप ही तो कहते है चांद के पास तो अनगिन्त सितारे है। हा बेटा। लेकिन बेटा हमारे जमाने में चांद के पास बहुत सारे उससे  प्यार करने वाले दोस्त होते थे ।
जो चांद को चंदा मामा चंदा मामा पुकारतें नहीं थकतें थे। कोई अपने घर के आँगन मे बैठकर चांद से बाते करते तो कोई अपने घर के झरोखें से चांद से बाते करते थे चांद उनकी बाते सुनकर मंद मंद मुस्कुराता था अपने नन्हें मुन्हे दोस्तों की मिठी मिठी प्यारी प्यारी बाते सुनकर खुश होता और हमेशा हसता मुस्कुराता रहता था।
लेकिन आज वक्त के साथ चांद से उसकी ये खुशियाँ छिन सी गई है। अब सब कुछ बदल गया है। आज चांद से बात करने वाले उसके मासूम दोस्त मोबाईल की  अँधेरी दुनियाँ में कही खो गये है।
अब मै चांद से बात करता हूं तो चांद मुझसे शिकायत करता हैं। अब कोई मुझसे बात नहीं करता है सब मोबाईल मे गेम खेलते है कोई मेरे साथ नहीं खेलता है कोई दादा दादी नाना नानी से मेरी कहानी नहीं सुनता है।
दादा जी आप ये ठीक कह रहें मेरे सारे दोस्त भी आज कल मोबाइल ही देखते रहते हैं। घर से बाहर जाकर खेलते भी नहीं है। चांद से बात करना तो दूर उसकी तरफ देख कर मुस्कुराते भी नही है।
दादा जी आप ये ठीक कह रहे है हम बच्चों को ऐसा नहीं करना चाहिए।  हमे अपनी जिंदगी में थोड़ा वक्त बचा कर अपने चंदा मामा से बात करना चाहिए।
दादा जी मुझे अपने चंदा मामा से बहुत सारी बाते करनी है। मै आज से ही अपने चंदा मामा से बाते करुंगी। फिर राधिका ने मुस्कुरा कर चांद की तरफ देखा और कहा चंदा मामा दूर के पुए पकाएं बूर के….।
चांद बदली से निकल आया राधिका की तरफ देख कर मुस्कुराने लगा।  ज़िंदगी की यही वो खुशी हैं जो इंसान को सही मायने मे जीना सिखाती हैं। और ज़िन्दगी में ख़ुशियों के ऐसे रंग भर देती हैं। जो ज़िंदगी में
कभी ना खत्म होने वाली विरासत बन जाती हैं।

लेखिका

सैयद शबाना अली

हरदा मध्य प्रदेश

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