Big profits from tiny grains: Chickpea farmingchane ki khaiti

चना रबी के मौसम में सर्वाधिक बोई जाने वाली पुश्तैनी फसल है। प्राचीन समय से चने की फसल किसान बोते आ रहे है। चना एक ऐसी फसल है जिसकी डिमांड बाजार में हमेशा बनी रहती है। ज्यादात्तर किसान गेंहु के साथ अपने खेतो में चने की फसल जरूर बोते है। चने की मांग हर क्षेत्र में बराबर बनी रहती है चने की मिठाई बेसन नमकीन पापड़ चने की सब्जी छोले चने फूटाने उबले चने मसालेदार आदि कई चिजो में चने का इस्तेमाल किया जाता है। हमारे देश से चने का निर्यात भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा समर्थन मुल्य पर चने की खरीदी किसानों से की जाती है चना एक नकदी फसल है जिसकी बुवाई कर किसान लाखों का मुनाफा कमा सकते है ये एक पारंम्परीक फसल है जो लगभग हर किसान द्वारा रबी के सीजन में बोई जाती है। किसान उन्नत तकनीक का उपयोग कर कम लागत में ज्यादा उत्पादन कर ज्यादा लाभ कमा सकते है।

चना रबी की मुख्य रूप से दलहनी फसल है। चने की खेती के लिए हल्की दोमट उपयुक्त मानी जाती है उसमें चने की फसल अच्छी होती है चने की खेती करने के लिए उपयुक्त समय अक्टूबर के अंतिम समय से नबंवर की शुरूआत में इसकी बुवाई की जाती है। ये ठंड के मौसम में ओस में ये ज्यादा फलती है।

चने की खेती के लिए खेत कैसे तैयार करें :-

चने की खेती के लिए खेत तैयार करने से पहले मिट्टी की जाँच अवश्यक कर लेनी चाहिए। चने की खेती के लिए हल्की दोमट या दोमट मिट्टी आवश्यक होती है। खेत तैयार करने के लिए खेत जोतने वाले हल से या मिट्टी पलटने वाले कल्टावेट से खेत की दो या तीन जुताई कर लेनी चाहिए। जुताई के बाद पाटा लगाये जिससे खेत समतल हो जाए। खेत में जल भराव की स्थिति नहीं होनी चाहिए। जल निकासी की पूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए।

चने की खेती बुवाई का उपयुक्त समय :-

चना रबी की एक मुख्य फसल है इसकी बुवाई अक्टूबर के अंतिम सप्ताह या नबंवर की शुरूआत में कर लेनी चाहिए। क्योकि इस समय तापमान 20 से 22 डिग्री के लगभग होता है जो चने के बीजो के अंकुरण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

चने की बुवाई की उपयुक्त विधी :-

फसल की बुवाई सही समय पर अक्टूबर महा में करें। चने की फसल के साथ मिश्रित फसल जैसे सरसों जौ आदि फसल को साथ में बोए चने की फसल की बुवाई प्रति 1 एकड़ में 35 से 40 किलो बीज प्रायाप्त होता है। यानी एक एकड़ जमीन में 35 से 40 किलो चने के बीजो का बोया

जाना चाहिए। चने के खेत में चने की बुवाई कतारों में की जाती है कतार से कतार की दूरी लगभग 30 सेंटी मीटर होनी चाहिए और पौधे से पौधे की दूरी का अंतर 10 सेंटी मीटर का होना चाहिए। बीजो को 4-5 इंच की गहराई में बोना चाहिए। क्योकि जिन खेतों में विल्ट रोग का प्रकोप अधिक होता है 4-5 इंच की गहराई पर बीज विल्ट रोग से सुरक्षित रहते है। बीज अनकुरण में भी आसानी होती है।

बीजो उपचार की उपयुक्त विधी :-

चने की बुवाई के पूर्व बीजो को उपचारित कर लेना चाहिए। बीजो को 3 ग्रात थैरम प्रति किलोग्राम या अन्य बताए गए रासायनिक उपचार से उपचारित कर लेना चाहिए इसके बाद बीजो का राइजोबियम कल्चर के एक पैकट से उपचारित करें।

चने की खेती के लिए उपयुक्त खाद्य उर्वरक :-

बुवाई के समय 20 टन सड़ी हुई गोबर की खाद्य 100 ग्राम डीएपी, 32 ग्राम एमओपी और 25 ग्राम सल्फर का उपयोग करें।

चने की खेती में उपयुक्त खरपतवार नियत्रंण :-

चने की बुवाई के तुरंत बाद पेंडीमेथलीन 3.3 लीटर प्रति हेक्टयर में छिडक़ाव किया जा सकता है। खेत में खरपतवार दिखने पर यांत्रिक नियत्रंण किया जा सकता है। खेत में खरपतवार होने पर निदाई और गुड़ाई करवाकर भी खरपतवार नियत्रंण किया जा सकता है।

चने की खेती में उपयुक्त सिंचाई :-

चना मुख्य रूप से एक असिंचित फसल है फिर भी इसमें बुवाई के बाद दो या तीन बार सिंचाई कर लेनी चाहिए।

चने की फसल में पहली सिंचाई :-

बुवाई के 30-35 दिन बाद, जब पौधे में शाखाएँ निकलना शुरू हों और खेत में नमी कम होने लगे।

चने की फसल में दूसरी सिंचाई :-

बुवाई के 70-75 दिन बाद, जब चने में घेटियां बनने लगे उस समय सिंचाई नहीं करनी चाहिए।

चने की फसल में फूल आने पर :-

इस समय सिंचाई बिल्कुल नही करना चाहिए यह सबसे नाज़ुक समय होता है सिंचाई करने से फूल गिर जाते हैं और फसल को नुकसान पहुंचता है।

चने की फसल में ईल्ली प्रकोप को कैसे नियंत्रण करें :-

चने की फसल में चने की घेटीयों में इल्लीयों के द्वारा छेदकर फसल को खराब कर देती है इसके बचाव के किसानों को चाहिए इससे फसल को

बचाने के लिए उपयुक्त उपाय करें। पक्षियों के लिये खुटियां लगाना:-

चने की फसल के बीच-बीच में प्रति हेक्टयर पर एक टी आकर की खूटी गाड़ देनी चाहिए जिससे कीड़े मकोड़े खाने वाले पक्षी आकर बैठेगें और चने की फसल में लगने वाली इल्लीयों को ये पक्षी खा लेते है जिससे चने की फसल का बचाव होता है। खूंटियां खेत में 1-1.5 फीट ऊंची टी आकार की 20-25 खूंटियां प्रति हेक्टेयर लगाएं, जिससे पक्षी बैठकर इल्लियों को खा सकें। फेरोमोन ट्रैप- नर पतंगों को आकर्षित कर नष्ट करने के लिए 4-5 प्रति एकड़ लगाएं। नीम का प्रयोग- छोटी इल्ली होने पर नीम के बीज का कर्नल (एन एस के) 5 प्रतिशत का छिडक़ाव करें (500 ग्राम/10 लीटर पानी) या नीम के तेल का प्रयोग करें। जैविक कीटनाशक- ब्यूवेरिया बेसियाना या बेसिलस थूरिंजिएन्सिस (डेलफिन/डिपेल) का छिडक़ाव करें। गर्मियों में गहरी जुताई- प्यूपा को नष्ट करने के लिए गर्मियों में खेत की गहरी जुताई करें और मेड़ों को साफ रखें।

रासायनिक खाद्य का उपयोग :-

1. इमामेक्टिन बेंजोएट 5 प्रतिशत एस जी 80 ग्राम प्रति एकड़ (200-250 लीटर पानी में) छिडक़ाव करें। क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एस सी 125 मिली प्रति हेक्टेयर (150 लीटर पानी में) छिडक़ाव करें। प्रोफेनोफॉस 50 ई सी /ट्राइजोफॉस- 2 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करें। फेनवलरेट 20 ई सी / साइपरमेथ्रिन 25 ई सी 50 मिली प्रति 100 लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करें (15 दिन के अंतर पर)। जब फसल में फूल आ जाए उस समय रासायनिक खाद्य के छिडक़ाव नहीं करना चाहिए।

चने की फसल कटाई का उपयुक्त समय :-

चने की फसल बुवाई के लगभग 100 से 135 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, जो चने की किस्म और मौसम पर निर्भर करता है। हरे चने के लिए फली भरने पर कटाई कर सकते हैं, जबकि सूखे चने के लिए पौधों के भूरा होने और पत्तियों के सूखने का इंतज़ार करना चाहिए, जिसकी कटाई आमतौर पर मार्च-अप्रैल के आसपास होती है। बुवाई के लगभग 100 से 120 दिन बाद फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है। कुछ जल्दी पकने वाली किस्में 100-105 दिनों में, तो कुछ 130-135 दिनों में पकती हैं यदि बुवाई देर से की गई हो (दिसंबर में), तो कम अवधि वाली (100-105 दिन) किस्मों का चुनाव करें, जो जल्दी तैयार हो जाती हैं।

सूखे चने के लिए :-

जब पौधे की पत्तियाँ पीली पडक़र सूखने लगें और चने की घेटियां भूरी और सख्त हो जाएँ, तब कटाई करनी चाहिए।

हरे चने के लिए :-

चने की घेटिया पूरी तरह भर जाएँ, लेकिन दाना कड़ा न हुआ हो, तब मटर की तरह तोड़ा जा सकता है। कटाई का सही तरीका फसल को पूरी तरह सूखने दें, फिर काटें। अत्यधिक नमी या बारिश से बचाएं। कटाई के बाद पौधों को खेत में या सूखी जगह पर फैलाकर 7-10 दिन सुखाएं, ताकि फलियों की नमी निकल जाए।

किसान भाई उन्नत तकनीक का उपयोग कर चने की फसल से दुगना मुनाफा कमा सकते है यदि आप एक हेक्टेयर में अच्छी तकनीक से चने की खेती करते है तो 20-22 क्विंटल उपज मिल सकती है, जिससे बाजार भाव के अनुसार 15,000 रू से 30,000 रू या उससे अधिक तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है, जबकि लागत लगभग 15,000 रू – 20,000रू प्रति हेक्टेयर आती है।

यह कमाई उपज की गुणवत्ता, बाजार मूल्य (3000 रू /क्विंटल से ऊपर) और उन्नत खेती के तरीकों (जैसे ट्राइकोडर्मा का उपयोग) पर निर्भर करती है। प्रति हेक्टेयर 10-12 क्विंटल से 20-22 क्विंटल तक उपज मिल सकती है, किसानों के अनुसार यह 30 क्विंटल तक भी हो सकती है।

बाजार भाव 3000 रू प्रति क्विंटल के भाव पर 25,000 रू -30,000 रू का शुद्ध लाभ संभव है, जो कीमत बढऩे पर और भी ज्यादा होगा। लागत :- एक हेक्टेयर में लगभग 15,000 रू -20,000 रू का खर्च आता है। उन्नत तकनीक :- ट्राइकोडर्मा जैसे जैविक तरीकों से फफूंद रोगों से बचाव और फास्फोरस की उपलब्धता बढ़ाकर पैदावार बढ़ाई जा सकती है।

सैयद रेशमा अली

हरदा मध्य प्रदेश

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