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Sunday, 8 November 2026
हरदा

शासकीय कृषि पानतलाई एवं ग्राम के अन्य किसानों के खेतों का निरिक्षण

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पावनसिटी हरदा

शासकीय कृषि प्रक्षेत्र पानतलाई एवं ग्राम के अन्य किसानों के खेतों का दौरा  जवाहरलाल कास्दे उपसंचालक कृषि, डाँ भागवत सिंह सोलंकी सहायक संचालक कृषि , डॉ श्रीचंद जाट बी टी एम टिमरनी द्वारा किया गया कृषक  सुशील गुर्जर के यहां चना एवं गेहूं फसल का निरिक्षण करते हुए फसल की स्थिति का जायजा लिया गया कृषक को अधिक ठंड के समय चना फसल को ठंड से बचाने के लिए उपाय में जब पाला पड़ने की संभावना हो, तो शाम या रात के समय हल्की सिंचाई करें। मिट्टी में नमी होने से तापमान स्थिर रहता है और जमीन की गर्मी लंबे समय तक बनी रहती है फूल आने और फल बनने की अवस्था में चना पाले के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है, इसलिए इस दौरान नमी बनाए रखना अनिवार्य है। मेड़ो पर शाम को खेत की उत्तर-पश्चिमी दिशा (जिधर से ठंडी हवा आती है) पर घास-फूस या कचरा जलाकर धुआं करें। धुएं की परत ‘ग्रीनहाउस प्रभाव’ पैदा करती है, जो गर्मी को रोककर खेत के तापमान को 2-3 डिग्री तक बढ़ा देती है। यदि किसान सिचाई एवं धुआं करने में असमर्थ है तो वह सल्फर (गंधक) का छिड़काव: 0.1% गंधक के घोल (1 लीटर गंधक को 1000 लीटर पानी में मिलाकर) का छिड़काव पाले से सुरक्षा प्रदान करने हेतु कर सकता है। यह छिड़काव लगभग 15 दिनों तक प्रभावी रहता है। किन्तु फसल में फूल आ चुके हों, तो अनावश्यक भारी सिंचाई या रसायनों के अनियंत्रित उपयोग से बचें क्योंकि इससे फूल झड़ने की समस्या हो सकती है। बताए गए शासकीय कृषि प्रक्षेत्र की फसल का अवलोकन करते हुए ब्रीडर् गेहूं किस्म एचआई 1650 एवं चना की आरवीजी 204 किस्म का अवलोकन किया गया साथ में प्राकृतिक खेती के क्षेत्र का अवलोकन कर समसामयिकी फसल की चर्चा की गई जिसमे प्राकृतिक फसल में जीवामृत का स्प्रे एवं निदाए गुड़ाई कर फसल को स्वस्थ बनाए रखने एवं किसान भाइयों को जीवंत प्रदर्शन का अवलोकन कराकर प्राकृतिक खेती हेतु प्रेरित करने के प्रयास किए जाने के बारे में निर्देश दिए गए इस दौरान ग्राम के कृषक श्री सुशील मणिशंकर गौर संतोष गौर रामस्वरूप गौर आदि उपस्थित रहे

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