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Friday, 9 October 2026
भोपाल

Bhopal News : प्रदेश कड़ी मेहनत रंग लाई,यूं बना टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश

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The hard work of the state paid off, this is how Madhya Pradesh became a Tiger State

बाघों ने चुन लिया प्रकृति का सुन्दर स्थान मध्यप्रदेश

Bhopal News : पृथ्वी का सबसे सुंदर प्राणी बाघ है और बाघों का मध्यप्रदेश में डेरा है। इस बात पर मध्यप्रदेश के लोगों को गर्व है। ठीक उसी प्रकार जैसे भारत देश को बाघों की 3682 संख्या पर गर्व है। यह दुनिया में बाघों की कुल संख्या का 75 प्रतिशत हैं। मध्यप्रदेश के लिए सबसे खुशी की बात यह है कि यहां टाइगर रिजर्व के बाहर भी बाघों की संख्या बढ़ रही है। आज अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश दुनिया को बता सकता है कि मध्यप्रदेश के लोगों को अपने बाघों पर अभिमान है।
सर्वाधिक बाघ मध्यप्रदेश में

मध्यप्रदेश में बाघों की आबादी 526 से बढक़र 785 पहुंच गई है। यह देश में सर्वाधिक है। प्रदेश में चार-पांच सालों में 259 बाघ बढ़े हैं। यह वृद्धि 2010 में कुल आबादी 257 से भी ज्यादा है।

वन विभाग के अथक प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से जंगल का राजा सुरक्षित है। सभी मिलकर यही संकल्प लें कि भावी पीढ़ी के लिए प्रकृति का बेहतर संरक्षण करें और एक सह्रदय भद्र पुरुष के रूप में बाघों के परिवार को फलने फूलने का अनुकूल वातावरण बनाने में सहयोग करें। बाघों की पुनर्स्थापना का काम एक अत्यंत कठिन काम था, जो मध्यप्रदेश ने दिन-रात की मेहनत से कर दिखाया।
ऐसे बना टाइगर स्टेट

बाघों की गणना हर 4 साल में एक बार होती है। वर्ष 2006 से बाघों की संख्या का आंकड़ा देखें तो वर्ष 2010 में बाघों की संख्या 257 तक हो गई थी। इसे बढ़ाने के लिए बाघों के उच्च स्तरीय संरक्षण और संवदेनशील प्रयासों की आवश्यकता थी। मध्यप्रदेश को बाघ प्रदेश बनाने की कड़ी मेहनत शुरु हुई। वन्यजीव सुरक्षा के कारण तेंदुओं की संख्या में भी मध्यप्रदेश देश में सबसे आगे है। देश में 12 हजार 852 तेंदुए हैं। अकेले मध्यप्रदेश में यह संख्या 4100 से ज्यादा है। देश में तेंदुओं की आबादी औसतन 60त्न बढ़ी है जबकि प्रदेश में यह 80त्न है। देश में तेंदुओं की संख्या का 25त्न अकेले मध्यप्रदेश में है।

वर्ष 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग बाघ सम्मेलन में बाघ की आबादी वाले 13 देशों ने वादा किया था कि वर्ष 2022 तक वे बाघों की आबादी दोगुनी कर देंगे। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मध्यप्रदेश में बाघों के प्रबंधन में निरंतरता एवं उत्तरोत्तर सुधार हुए।
बाघों की संख्या में 33 प्रतिशत की वृद्धि चक्रों के बीच अब तक की सबसे अधिक दर्ज की गई है जो 2006 से 2010 के बीच 21प्रतिशत और 2010 और 2014 के बीच 30 प्रतिशत थी। बाघों की संख्या में वृद्धि, 2006 के बाद से बाघों की औसत वार्षिक वृद्धि दर के अनुरूप थी।

मध्यप्रदेश में 526 बाघों की सबसे अधिक संख्या है। इसके बाद कर्नाटक में 524 बाघों की संख्या 442 बाघों के साथ उत्तराखंड तीसरे नंबर पर था। मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है कि वर्ष 2022 की समय-सीमा से काफी पहले यह उपलब्धि हासिल कर ली है।

मध्यप्रदेश ने टाइगर राज्य का दर्जा हासिल करने के साथ ही राष्ट्रीय उद्यानों और संरक्षित क्षेत्रों के प्रभावी प्रबंधन में भी देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। सतपुडा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल किया गया है।

भारत सरकार की टाइगर रिज़र्व के प्रबंधन की प्रभावशीलता मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार पेंच टाइगर रिजर्व ने देश में सर्वोच्च रैंक हासिल की है। बांधवगढ़, कान्हा, संजय और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन वाले टाइगर रिजर्व माना गया है। इन राष्ट्रीय उद्यानों में अनुपम प्रबंधन योजनाओं और नवाचारी तरीकों को अपनाया गया है।