अजब मध्य प्रदेश की गजब कहानी
मध्य प्रदेश के भाजपा के शासनकाल में अजब मध्य प्रदेश की गजब कहानी ने शिक्षा विभाग में कर रहे 51 शिक्षकों ने फर्जी D.Ed,B.Ed और अंक सूची के आधार पर सरकारी नौकरी कर रहे थे भाजपा शासित शिवराज चौहान मुख्यमंत्री थे भाजपा शासन में ऐसी घटनाएं आसानी से देखने में मिल जाती है मगर यह मामला मध्य प्रदेश के भाजपा के मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यकाल में उजागर हुआ है कभी यह घोटाला कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश सरकार का होता तो यह रोड पर 70 सालों में का ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ देते मगर यह भ्रष्टाचार भाजपा शासित शासनकाल में हुआ है और उजागर भी भाजपा शासित शासनकाल में हुआ है अब देखना यह है कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है क्या यह शिक्षक भर्ती में 51 शिक्षकों ने जो 20 वर्षों से वेतन लिया है उनसे वह वेतन वापस ले पाएगी लगभग अनुमानित 100 करोड़ का मध्य प्रदेश शासन को चूना लगाया गया है क्या इस पर वर्तमान भाजपा शासित सरकार दोषियों पर कार्रवाई कर पाएगी यह तो अभी मीडिया में सुर्खी बना हुआ है आगे देखना है क्या क्या होगा या उन मामलों की तरह यह मामले अभी दवा दिया जाएगा शिवराज शासन काल में एक व्यापम घोटाला भी हुआ था जिसमें शिक्षा मंत्री स्वर्ग की लक्ष्मी नारायण शर्मा जी को इस घोटाले का मुख सरगना बनाकर पूरा दोष उनके ऊपर डाल दिया गया था उसे समय भी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज चौहान मध्य प्रदेश के मुखिया थे वह उसे मामले में भी लीपा पोती कर मामले को दबा दिया गया क्या यह मामला भी उसी स्तर पर दवा दिया जाएगा यह तो वक्त ही बताएगा
मध्य प्रदेश के इंदौर में फर्जी डी.एड-बी.एड डिग्री और अंकसूचियों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले 51 शिक्षकों पर फिर होगी। ये शिक्षक करीब 20 साल से सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इनमें कई प्रमोशन भी पा चुके हैं। इन शिक्षकों की वर्तमान मासिक सैलरी 50 हजार से 1 लाख रुपए तक है। विभाग नौकरी के दौरान मिले वेतन की गणना कर रहा है। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, वसूली की राशि करीब 100 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। मामला सांवेर में 2006-07 की संविदा शाला शिक्षक भर्ती का है, जो शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार के दौरान हुई थी। जांच में 51 शिक्षकों की डिग्री-अंकसूची फर्जी पाई गई है, जबकि 23 अन्य संदिग्ध शिक्षकों की जांच जारी है। लोकायुक्त ने 74 शिक्षकों का रिकॉर्ड मांगा है।







