मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छिंदवाड़ा दौरे के दौरान जन शिकायतों के निराकरण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रभारी CMHO, एक तहसीलदार और एक पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जनता की शिकायतों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाएगा। जो अधिकारी व कर्मचारी आम जनता की समस्याओं का नियाकरण नहीं करता तो उसको उसके पद से तत्काल हटा दिया जाएगा छिंदवाड़ा दौरे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंच से यह घोषणा की अधिकारी एवं कर्मचारी सुन ले

मुख्यमंत्री ने बताया कि लगातार मिल रही शिकायतों की समीक्षा के बाद यह कार्रवाई की गई। निलंबित अधिकारियों में प्रभारी CMHO डॉ. नरेश गुजाड़े, तहसीलदार सुनेना ब्रह्मे और हल्का नंबर-2 के पटवारी सिद्धांत साहू शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, प्रसूति सहायता राशि नहीं मिलने, सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं होने तथा राजस्व संबंधी मामलों में लापरवाही की शिकायतें सामने आई थीं, जिनके आधार पर कार्रवाई की गई।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत अब हर  नियमित बैठकों के बजाय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी सीधे क्षेत्र में जाकर जमीनी स्थिति का जायजा लेंगे, लोगों से संवाद करेंगे

मौके पर ही समस्याओं के समाधान का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल बैठकों तक सीमित रहना नहीं, बल्कि आम जनता को त्वरित राहत देना डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों और कर्मचारियों की लंबित पदोन्नति का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वर्षों से अटकी प्रमोशन प्रक्रिया को सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है और जिन विभागों में पदोन्नति या भर्ती की प्रक्रिया लंबित है, वहां भी तेजी से निर्णय लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शी प्रशासन और जवाबदेही दोनों आवश्यक हैं।

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