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Sunday, 8 November 2026
हरदा

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में 90वीं शिव जयंती मनाई गई

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पावनसिटी हरदा

 टिमरनी संवाददाता ब्रजेश रिछरिया

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय टिमरनी में बहुत ही धूमधाम से शिव ध्वज लहराकर और परमात्मा शिव को भोग स्वीकार कराकर महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया गया। इस उपलक्ष्य में माउंट आबू से आए ब्रह्माकुमार मुकेश भाई जी ने महाशिवरात्रि के पावन पर्व के आध्यात्मिक मर्म को स्पष्ट करते हुए बताया कि निराकार परमपिता परमात्मा शिव के अवतरण दिवस को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। रात्रि शब्द इस बात का परिचायक है कि कलयुग के अंतिम समय में जब चारों ओर अज्ञानता का अंधियारा होता है मनुष्य अनेक प्रकार की विकृतियों से घिर जाता है और चाह कर भी नहीं निकल पाता तब ज्ञान सागर परमपिता परमात्मा शिव इस धरा पर अवतरित होकर ज्ञान का प्रकाश फैलाकर मुक्ति जीवन मुक्ति का रास्ता बताते हैं।
परमात्मा शिव का ध्वज हमें संदेश देता है कि हम स्वयं परमात्मा शिव की यादों में रहे। साथ ही अपने अन्दर के विकारों को दूर करने का प्रयास करें। महाशिवरात्रि के पर्व पर हमें अपने अन्दर की बुराईयों को अर्पण करने से परमात्मा हमारे अन्दर सदगुणों को भर देते हैं इसी की यादगार में हम कड़वी चीजें परमात्मा शिव पर अर्पण करते हैं। उपवास रखते हैं जिसका भावार्थ यह है कि ऊपर की ओर वास करना अर्थात मन बुद्धि से सदा परमात्मा के समीप रहना। जागरण करते हैं तो एक दिन का जागरण नहीं लेकिन ज्ञान की जागृति सदा कल के लिए हमें अपने जीवन में लानी है क्योंकि जब ईश्वरी ज्ञान से हम स्वयं को संपन्न करते हैं तो हमारा आत्म शुद्धिकरण होने लगता है और ज्ञान युक्त कर्म से कर्मों में श्रेष्ठता आती है। दूध और पानी पवित्रता का प्रतीक है कि हमें मन वाणी और कर्म में पवित्रता, शुद्धता को धारण करना है शहद मधुरता का प्रतीक है हमें अपनी वाणी और जीवन में मधुरता को धारण करना है। इस प्रकार से हर एक बात के महत्व को समझ कर हमें सच्ची शिवरात्रि मनानी है अंत में सभी भाई बहनों को प्रसाद (भोग) वितरण किया गया।

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