Gazal : मैंने तो सारा घर बांट दिया संसार को…
अच्छा हुआ भुला दिया तुने मेरे प्यार को, मैंने तो सारा घर बांट दिया संसार को, तेरा प्यार न जाने…
Gazal : मेरा साया आज मेरे साथ नहीं…
मेरा साया आज मेरे साथ नहीं, किस गली से गुजरा हूं मैं आज मुझे याद नहीं, जिन्दगी में हर मुकाम…
कहानी बिन डोरी की पतंग
आज मकर संक्रान्ति का त्यौहार था। साक्षी अपने बहेन-भाई के बच्चों के साथ घर की छत पर पतंग उड़ा रही…
