1. छतरपुर। नए कलेक्टर मृणाल मीणा ने पदभार संभालते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल शुरू कर दिया है। पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद उन्होंने जिले में रिश्वतखोरी के एक गंभीर मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी दिनेश कुमार दीक्षित को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

मामला एक समाचार माध्यम में प्रसारित खबर और वीडियो से जुड़ा है। इसमें आरोप था कि नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में दिनेश कुमार दीक्षित द्वारा पैसों के लेन-देन की बातचीत की गई है। मामले का संज्ञान लेते ही कलेक्टर मृणाल मीणा ने तत्काल प्रतिवेदन तैयार कर संभागायुक्त सागर को भेजा। कलेक्टर के प्रतिवेदन पर प्रशासन ने भी फुर्ती दिखाई और आयुक्त, सागर संभाग अनिल सुचारी ने दो घंटे के भीतर ही निलंबन आदेश जारी कर दिए। यह कार्रवाई प्रशासन की भ्रष्टाचार के प्रति सख्ती को साफ दर्शाती है।

जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि प्रसारित वीडियो के आधार पर प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि नियुक्ति के नाम पर पैसों की मांग की गई। इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है। आदेश के अनुसार दिनेश कुमार दीक्षित को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संयुक्त संचालक, महिला एवं बाल विकास विभाग, सागर संभाग, सागर निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। साथ ही विभागीय स्तर पर मामले में आगे की जांच और कार्रवाई भी की जाएगी।

कलेक्टर मृणाल मीणा ने पदभार ग्रहण करते ही यह स्पष्ट कर दिया है कि जिले में भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करते हुए दोषी अधिकारियों पर त्वरित और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक हलकों में इस त्वरित कार्रवाई की चर्चा है। आमजन ने भी इसे स्वागत योग्य कदम बताया है। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से जिले में भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचेगा।

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