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1861 से लेकर 1359 तक के पूरे बंदोबस्त रिकॉर्ड मौजूद हैं!’ फिरोज़ खान के बड़े खुलासे के बाद क्या दोबारा बनेगी सहारनपुर मस्जिद?

 

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में ऐतिहासिक मस्जिद को ज़मींदोज़ किए जाने के बाद अब इस पूरे विवाद में एक बेहद बड़ा और निर्णायक मोड़ आ गया है। जिस ज़मीन को प्रशासन सरकारी संपत्ति बताकर बुलडोज़र कार्रवाई को सही ठहरा रहा था, अब उस ज़मीन के असली मालिकाना हक़ रखने वाले वारिस ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ सामने आ गए हैं। इस नए खुलासे के बाद अब यह सवाल तेज़ी से गूंजने लगा है कि क्या सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद का पुनर्निर्माण होगा?

ज़मीन के मूल मालिक याकूब खान के पड़पोते फिरोज़ खान ने मीडिया के सामने आकर कागज़ात की पूरी सच्चाई उजागर की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खसरा नंबर 539 के तहत दर्ज यह ज़मीन उनके परदादा याकूब खान और वाहिद खान की है। उनके पास 1861, 1867, 1889, 1324 और 1359 (फ़सली/हिजरी बंदोबस्त) के मुकम्मल राजस्व रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिनमें ज़मीन का एक-एक रकबा और मालिकाना हिस्सा दर्ज है। मुस्लिम पक्ष अब इन अकाट्य दस्तावेज़ों को आधार बनाकर उच्च न्यायालय (High Court) में याचिका दाखिल करने की तैयारी में है। 1861 से चले आ रहे इन पुख्ता साक्ष्यों के सामने आने के बाद अदालत में प्रशासनिक दावों का टिकना बेहद मुश्किल नज़र आ रहा है।

 

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