पावनसिटी समाचार 

मध्य प्रदेश के सागर जिले में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक राजस्व निरीक्षक (आरआई) को 7 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी राजस्व निरीक्षक अविनाश सिंघई ने किसान की कृषि भूमि का सीमांकन करने के बदले रिश्वत मांग रहा था। जैसे ही उसने रिश्वत की राशि अपने हाथ में ली, पहले से घात लगाए लोकायुक्त की टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया। मध्य प्रदेश के हर जिले में राजस्व विभाग में सबसे अधिक भ्रष्टाचार किया जा रहा है राजस्व विभाग में बाबू से लेकर चपरासी तक एवं वरिष्ठ अधिकारी तक बिना रिश्वत लिए फाइल को आगे नहीं बढ़ते हैं राजस्व विभाग सबसे बेस्ट विभाग हो चुका है सरकार को इस पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है यहां पर फाइल पर वजन रखने पर ही फाइल आगे चलती है जिस फाइल पर वजन नहीं रखा जाता वह फाइल ऐसे ही धूल खाती फिरती है राजस्व विभाग में आप कुछ समय वहां पर मौजूद रहेंगे तो वहां के रिश्वतखोरी की चर्चा  करते लोग आसानी से देखने को मिल जाते हैं

जानकारी के अनुसार, कर्रापुर निवासी किसान लखन सिंह ने अपनी कृषि भूमि के सीमांकन के लिए आवेदन दिया था। 18 मार्च को सीमांकन का आदेश जारी होने के बावजूद परसोरिया हल्का में पदस्थ राजस्व निरीक्षक अविनाश सिंघई लगातार कार्रवाई टालता रहा। आरोप है कि उसने सीमांकन करने के बदले पहले 8 हजार रुपये की रिश्वत मांगी, बाद में सौदा 7 हजार रुपये में तय हुआ।

रिश्वत की मांग से परेशान किसान ने सागर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। गुरुवार को पुराने तहसील कार्यालय परिसर में जैसे ही किसान ने तय राशि आरोपी को सौंपी, टीम ने उसे रंगेहाथ पकड़ लिया। आरोपी के हाथों का केमिकल टेस्ट भी किया गया, जिसमें घोल का रंग लाल हो गया और रिश्वत लेने की पुष्टि हुई।

लोकायुक्त निरीक्षक रंजीत सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई को सागर में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

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