पावनसिटी समाचार

जिले में अलनीनो के प्रभाव के कारण मानसून बारिश की अनिश्चितता एवं सामान्य से कम वर्षा की संभावना को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह दी गई है कि वे कृषि वैज्ञानिकों की सलाह अनुसार ही फसल लगाएं। बुधवार को कलेक्टर  ऋषव गुप्ता की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में अपर कलेक्टर श्रीमती सृष्टि देशमुख गौड़ा, उप संचालक कृषि तथा कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिक भी मौजूद थे। बैठक में कलेक्टर  गुप्ता ने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में यदि वर्षा सामान्य से 40 प्रतिशत तक कम रहती है, तो उसी के अनुरूप फसल लगाने के लिए किसानों को प्रेरित किया जाए। उन्होंने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले के अधिक से अधिक अऋणी किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ा जाए, ताकि प्राकृतिक आपदा, सूखा अथवा प्रतिकूल मौसम की स्थिति में किसानों को बीमा का सुरक्षा कवच मिल सके। उन्होंने फसल बीमा कराने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान शुरू करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में उप संचालक कृषि  नितेश यादव ने बताया कि खरीफ मौसम के लिए विस्तृत आकस्मिक कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। इस कार्ययोजना के अनुसार किसानों को प्रतिकूल मौसम में परिस्थितियों के अनुसार फसल लगाने के लिए किसानों को प्रेरित किया जाएगा।

किसानों से अपील

उप संचालक कृषि नितेश कुमार यादव ने जिले के किसानो से अपील की है कि उपलब्ध नमी एवं वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए किसानों को वैज्ञानिक कृषि सलाह अनुसार ही फसल लगाएं। उन्होंने किसानों से उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने के साथ ही किसानों को सोयाबीन फसल की बुवाई हेतु “रिज एंड फरो”, “रेज बेड” तकनीक अपनाने के साथ ही अंतर्वर्तीय फसल पद्धति अपनाने तथा कम पानी में पकने, सूखे के प्रति सहनशील फसलो एवं किस्मो का ही चुनाव करने की अपील की है। कृषि वैज्ञानिको ने सुझाव दिया कि कम बारिश होने की स्थिति में सोयाबीन फसल में बीज अंकुरण की समस्या से बचाव के लिए नैनो डीएपी से बीज का उपचार करें। साथ ही वर्षा जल का संरक्षण, और मिट्टी में नमी का संचयन के लिए मल्चिंग का उपयोग करें।

किसानों को जरूरी सलाह

उप संचालक कृषि  यादव ने किसानों को फसल विविधीकरण एवं जोखिम प्रबंधन के उद्देश्य से सोयाबीन, उड़द, मूंग, चवला, ज्वार एवं अरहर फसलो का चुनाव करने की सलाह दी है। उन्होंने सोयाबीन फसल के साथ अंतरवर्तीय खेती अर्थात इंटरक्रॉपिंग तथा मिश्रित खेती प्रणाली अपनाने की सलाह दी है। श्री यादव ने बताया कि सोयाबीन के साथ अरहर, उड़द अथवा लोबिया की अंतरवर्तीय खेती कम वर्षा की परिस्थितियों में अपेक्षाकृत बेहतर परिणाम देती है तथा किसानों की आय के जोखिम को कम करती है। उप संचालक कृषि श्री यादव ने किसानों को कम वर्षा एवं सूखे की संभावित परिस्थतियो को देखते हुए कृषको को अल्प एवं माध्यम अवधि की सूखा सहनशील सोयाबीन किस्मे जैसे JS-2172, NRC-150, NRC-142, NRC-130, JS 20-116, JS-2069, JS-9560 आदि का चयन कर बुवाई की सलाह दी है।

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