पावनसिटी  नर्मदापुरम

कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने फील्ड में उतरकर साफ किया 33 सवालों के अलावा कुछ नहीं पूछा जाएगा, न दस्तावेज, न ओटीपी

हमारे समय में एक अजीब-सी आशंका हमेशा साथ चलती है। कोई दरवाज़ा खटखटाए और पहला सवाल होता है

कौन है? क्यों आया है? क्या पूछेगा?

ऐसे समय में जनगणना जैसे बड़े काम के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ आंकड़े जुटाना नहीं,बल्कि भरोसा जुटाना भी है।

नर्मदापुरम में कलेक्टर सोमेश मिश्रा जब खुद फील्ड में उतरते हैं, तो यह सिर्फ एक औपचारिक निरीक्षण नहीं रह जाता

यह एक संदेश बन जाता है। मालाखेड़ी रोड पर चल रहे मकान सूचीकरण कार्य के दौरान उन्होंने न सिर्फ काम देखा,

बल्कि लोगों से बात भी की।

फीडबैक लिया सुना और समझाने की कोशिश की। क्योंकि कई बार लोगों को प्रक्रिया से ज्यादा डर प्रक्रिया के पीछे छिपे भ्रम से होता है।

कलेक्टर ने साफ कहा

न कोई कागजी कार्रवाई

न कोई पैन कार्ड पूछा जाएगा

न आधार

न ओटीपी

यानी जो डर अक्सर फोन कॉल और फर्जीवाड़े से जुड़ जाता है,

उसे पहले ही खत्म करने की कोशिश की गई।

उन्होंने यह भी बताया कि सिर्फ 33 सवाल पूछे जाएंगे और वही सवाल जो पहले से तय हैं।

इनके अलावा कुछ भी नहीं।

यह बात जितनी सरल है उतनी ही जरूरी भी। क्योंकि आज जानकारी देना लोगों के लिए आसान नहीं रहा ,हर जानकारी के साथ एक आशंका जुड़ी होती है।

इसीलिए यह भी कहा गया कि कोई दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे।

सिर्फ वही लोग, जिन्होंने खुद से ऑनलाइन जानकारी भरी है,

उन्हें अपना सेल्फ एन्यूमरेशन आईडी देना होगा।

बाकी प्रक्रिया सीधी है

घर कैसा है

कितने लोग रहते हैं…

यानी यह सिर्फ गिनती नहीं

यह एक तस्वीर है समाज की, जीवन स्तर की, जरूरतों की। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में एक और बात सामने आती है

जब अधिकारी खुद मौके पर पहुंचते हैं,

तो प्रक्रिया कागज से निकलकर संवाद में बदल जाती है।

एसडीएम जय सोलंकी, मास्टर ट्रेनर पंकज दुबे और अन्य अधिकारी भी साथ मौजूद थे। लेकिन असली मौजूदगी उस भरोसे की थी, जिसे बनाने की कोशिश की जा रही थी।

जनगणना हर दस साल में होती है

लेकिन भरोसा हर दिन बनाना पड़ता है।

और अगर इस प्रक्रिया में लोग सहज महसूस करें, तो शायद आंकड़े भी ज्यादा सच्चे होंगे और तस्वीर भी ज्यादा साफ।

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