पावनसिटी हरदा

मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान अंतर्गत अपर संचालक कृषि, श्रीमान रेवा सिंह सिसोदिया, बीज प्रमाणीकरण संस्था, भोपाल द्वारा जिले में विभागीय गतिविधियों की समीक्षा हेतु हरदा जिले मे भ्रमण किया गया।

भ्रमण के दौरान दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन अंतर्गत अरहर प्रदर्शन, कस्टम हायरिंग सेंटर, नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल अंतर्गत सोयाबीन प्रदर्शन तथा नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के बायो रिसोर्स सेंटर का निरीक्षण किया गया। भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत हंडिया से जुगारिया, जुगारिया से अबगांवकला, अबगांवकला से उड़ा तथा उड़ा से आलमपुर तक विभिन्न कृषि गतिविधियों का अवलोकन एवं कृषकों से संवाद किया गया। कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा

वर्तमान में सोयाबीन फसल में पत्तियों का पीलापन, पौधों का मुरझाना, निचली पत्तियों का सूखना तथा पत्तियों पर असामान्य पनिले धब्बे दिखाई देने की स्थिति में रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट रोग की संभावना हो सकती है। अधिक नमी की स्थिति में संक्रमित पत्तियां ऐसी दिखाई देती हैं, जैसे उन्हें पानी में उबाला गया हो। ऐसी परिस्थितियों में किसान खेत का नियमित निरीक्षण करते हुए समय पर रोग नियंत्रण उपाय अपनाएं।

रासायनिक प्रबंधन

रोग के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर निम्न में से किसी एक फफूंदनाशी का प्रति एकड़ की अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करें—

पायराक्लोस्ट्रोबिन + इपॉक्सीकोनाजोल @ 300 मिलीलीटर/एकड़, अथवा

फ्लुक्सापायरोक्सड + पायराक्लोस्ट्रोबिन @ 120 मिलीलीटर/एकड़।

तना मक्खी, पीला मोजैक एवं इल्लियों के प्रबंधन हेतु

फसल में तना मक्खी, पीला मोजैक एवं इल्लियों के प्रकोप की स्थिति में निम्न में से किसी एक की अनुशंसित मात्रा का प्रति एकड़ छिड़काव करें—

बीटा साइफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड @ 140 मिलीलीटर/एकड़, अथवा

थायमेथोक्सम + लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन @ 50 मिलीलीटर/एकड़।

किसानों के लिए विशेष सावधानियां

कृषि विभाग द्वारा किसानों से अपील की गई है कि—

खेत में जलभराव न होने दें तथा अतिरिक्त पानी की निकासी की उचित व्यवस्था रखें।

अत्यधिक नमी एवं लगातार वर्षा की स्थिति में फसल की नियमित निगरानी करें।

रोग एवं कीट के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देते ही अनुशंसित कृषि रसायनों का उपयोग करें।

फफूंदनाशी एवं कीटनाशी का प्रयोग अनुशंसित मात्रा एवं लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार ही करें।

अनावश्यक अथवा निर्धारित मात्रा से अधिक रसायनों का छिड़काव न करें।

भ्रमण के दौरान उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास श्री प्रकाश ठाकुर जी, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर ओम प्रकाश भारती, श्रीमान रूपचंद जाटव जी एवं कृषि विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहें।

कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा किसानों से अपील की है, कि वे अपनी सोयाबीन फसल की सतत निगरानी रखें और किसी भी प्रकार के रोग अथवा कीट के लक्षण दिखाई देने पर निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक/कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर उचित तकनीकी सलाह प्राप्त करें।

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