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Sunday, 8 November 2026
हरदा

मिशन हैप्पी हरदा के तहत इसरों के वैज्ञानिक ने बताया कृषि में सेटेलाइट का महत्व

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पावनसिटी हरदा

हरदा- मिशन हैप्पी हरदा के तहत किसानों एवं युवाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने हेतु डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय एवं सत्यशिव फार्म, पानतलाई के संयुक्त तत्वावधान में शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज हरदा में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में इसरो वैज्ञानिक  शशिकांत ए. शर्मा ने कृषि में सेटेलाइट तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान एवं आधुनिक डिजिटल मानचित्रण प्रणाली के उपयोग पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।

अपने संबोधन में  शर्मा ने बताया कि नासा एवं इसरो द्वारा संयुक्त रूप से विकसित “निसार” उपग्रह तकनीक के माध्यम से कृषि मानचित्रण, मौसम विश्लेषण, जल संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी एवं आपदा प्रबंधन जैसे कार्य अत्यंत तेजी और सटीकता से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक उपग्रह तकनीक किसानों को वैज्ञानिक खेती की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसरो द्वारा विकसित “वेदास” (पृथ्वी अवलोकन आंकड़ा दृश्यांकन एवं संग्रह प्रणाली) वेबसाइट की जानकारी देते हुए बताया कि यह एक अत्याधुनिक भू-स्थानिक एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली आधारित डिजिटल मंच है, जिसके माध्यम से उपग्रह आंकड़ों का विश्लेषण कर किसानों, शोधकर्ताओं एवं शासकीय विभागों को उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।

शर्मा ने बताया कि वेदास पोर्टल पर फसल स्वास्थ्य, वर्षा, जल संसाधन, वन क्षेत्र, प्रदूषण, वायु गुणवत्ता, जले हुए क्षेत्रों (बर्न्ट एरिया) एवं बाढ़ संभावित क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ उपलब्ध रहती हैं। किसान अपने खेतों के पुराने वर्षों के आंकड़े भी देख सकते हैं, जिससे उन्हें फसल उत्पादन एवं भूमि की स्थिति को समझने में सहायता मिलती है। इससे वैज्ञानिक खेती एवं फसल प्रबंधन को बढ़ावा मिल रहा है। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों एवं छात्र-छात्राओं ने विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न रखे, जिनका श्री शर्मा ने सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समाधान प्रस्तुत किया। इस संवाद से युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान एवं आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त हुई, वहीं किसानों को वैज्ञानिक खेती, मृदा स्वास्थ्य एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों के बारे में उपयोगी जानकारी मिली।

कार्यक्रम के दौरान भरत टांक ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को आधुनिक तकनीकों के साथ जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि तकनीक एवं प्राकृतिक खेती के समन्वय से कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाया जा सकता है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्या सुश्री अभिरुचि सिंह ने कहा कि हरदा जिले में कृषि क्षेत्र में इस तकनीक के उपयोग से किसानों को निश्चित रूप से लाभ मिलेगा तथा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। आभार प्रदर्शन करते हुए श्री विकास भूमरकर ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ युवाओं एवं किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं, जिनका लाभ भविष्य में समाज एवं कृषि क्षेत्र को मिलेगा।

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