पावनसिटी हरदा
मध्य प्रदेश राज्य के हरदा जिले की हंडिया तहसील के ग्राम अजनास रैय्यत के प्रशासन से निराशा मिली, तब जिला पंचायत भवन में ही जहर खा लिया…! किसान भगत सिंह पिता रामकृष्ण विश्वकर्मा उम्र 55 वर्ष मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचा।
प्रशासन से निराशा मिली, तब जिला पंचायत भवन में ही जहर खा लिया…!
जब मौके पर तड़पने लगा तब मौजूद अधिकारी हरकत में आए… उसे तुरंत जिला अस्पताल लेकर गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई…!
अस्पताल पहुंचे मृतक भगत सिंह के बेटे राकेश ने बताया, परिवार में जमीन का विवाद चल रहा है,जिसकी शिकायत लगातार जनसुनवाई में कर रहे थे! लेकिन अधिकारियों ने अभी तक समस्या का निराकरण नहीं किया…!
मंगलवार को भी उसके पिता भगत सिंह जनसुनवाई में शिकायत लेकर आए थे, फिर उनको निराश होकर लौटना पड़ रहा था…हताश होकर उन्होंने जिला पंचायत में ही सल्फास खाली…!जिसकी परिजनों को जानकारी नहीं थी।
मौके पर मीडिया के प्रतिनिधि मौजूद थे..पीड़ित ने पत्रकारों को बताया मैंने जहर खा लिया है…
एक किसान मर चुका है, सिर्फ इसलिए कि उसकी सुनवाई नहीं हो रही थी…!
अभी तक तहसीलदार ने समस्या को नहीं सुना। पटवारी ने नहीं सुना । एसडीएम ने नहीं सुना। और जब कलेक्टर के पास पहुंचा तब कलेक्टर ने भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया….!
कलेक्टर ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों की तरफ आवेदन को बढ़ा दिया…!
जब कहीं से उम्मीद की किरण नजर नहीं आई…तब किसान ने जीवन लीला समाप्त कर ली है…!
यह इतनी दु:खद घटना है कि, प्रशासन तंत्र की अव्यवस्था की पोल खोल रहा है…!किसान कितने दिन से अधिकारियों के चक्कर लगा रहा था ,इस विषय को राज्य सरकार को संज्ञान में लेना चाहिए…!
जब जनसुनवाई में सुनवाई नहीं होती है फिर यह सुनवाई किस बात के लिए हो रही है…?दिल को कचोटने वाला सवाल है..!
यह जनसुनवाई का ढकोसला किस बात के लिए चलाया जा रहा है…!मृतक किसान के गांव में प्रशासन को सांझ चौपाल लगाने के लिए जाने की जरूरत नहीं थी,वो खुद अधिकारियों की के दरवाजे तक आ रहा था…फिर भी उसकी सुनवाई नहीं की गई,इससे दु:खद घटना और क्या होगी…?
यह पीड़ा जन सामान्य के जह़न में उतरने वाली है…पर कोई कुछ नहीं बोलेगा..!
प्रत्येक टीएल की मीटिंग में और राजस्व विभाग की मीटिंग में कलेक्टर के द्वारा ढिंढोरा पीटा जाता है.. अविवादित नामांतरण बंटवारे प्राथमिकता से किए जाने चाहिए…यह सूचना सिर्फ अखबारों तक सीमित है…!खबरों तक सीमित है …!मैदानी क्षेत्र में अधिकारी, कलेक्टर की भी नहीं सुन रहे हैं…!तब एक हताश और निराश किसान को प्रशासन की चौखट पर आत्महत्या करने जैसा कदम उठाना पड़ा है.

