पावनसिटी हरदा

 संपादक सैयद अशफाक अली 

मो. 9425045481

मध्य प्रदेश शासन के द्वारा नए पोर्टल के कारण राज्यों में कई जिलों में परिवहन विभागों में कमर्शियल वाहनों का फिटनेस पूर्णता बंद कर दिया गया है जिससे वाहन मालिकों को फिटनेस करने में असुविधा हो रही है जिसमें सबसे अधिक समस्या स्कूली बसों स्कूल ऑटो एवं लोकल ट्रक सर्विस वाले को हो रही है और ऊपर से हरदा जिले में 1 अगस्त से 31 अगस्त तक के बीच में यातायात विभाग द्वारा वाहन चेकिंग की जा रही है जिससे स्कूल में चलना है बस ऑटो रिक्शा को चल रहे बहन मालिकों को भारी भरकम ज जुर्माना झेलना पड़ा है शुक्रवार को स्कूल बस एवं ऑटो संचालकों ने हड़ताल कर प्रशासन को सामने अपनी मांग रखी कहा गया कि हरदा परिवहन विभाग में हमारे गाड़ियों का फिटनेस नहीं हो रहा है ऊपर से यातायात के पुलिस कर्मचारी हमारी बच्चों से भारी गाड़ियों को रोक कर भारी भरकम चालान कर रहे हैं यहां तक की गली पहुंचे में भी रोक कर चलने कार्रवाई की जा रही है जिला प्रशासन के आला अधिकारियों इस मामले में चुप्पी सादे हुए हैं हरदा पुलिस अधीक्षक शशांक के दिशा निर्देश में यातायात विभाग द्वारा ऑटो एवं बेसन का चेकिंग की जा रही है और चालानी कार्रवाई की जा रही है पुलिस अधीक्षक को जिले में चल रहे स्कूली वाहन ऑन के संचालकों को बिठाकर एक समझाइए देना चाहिए और उनके वाहनों को कागज बनाने के लिए जिले में फिटनेस के लिए कैंप का आयोजन किया जाना चाहिए जिससे उनको दूसरे जिलों में 100 डेढ़ सौ किलोमीटर जाकर फिटनेस में जो पैसा खर्च हो रहा है उसे उनको राहत मिल सके जिला प्रशासन को बस संचालक ऑटो संचालक के परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए कुछ न्याय उचित कदम उठाना चाहिए जिससे समस्या का समाधान किया जा सके क्या जिला प्रशासन जनहित में प्रसारित इस खबर पर ध्यान देगा,,,,,

हरदा जिले मे 2500 वाहन मालिक सड़क पर, 100 KM दूर भटकने को मजबूर

मध्य प्रदेश के हरदा जिले में प्रशासन की एक “छोटी सी” सुविधा बंद करने के फैसले ने हरदा जिले के हजारों वाहन मालिकों की कमर तोड़ दी है। जिला परिवहन कार्यालय हरदा में वाहनों के फिटनेस की सुविधा अचानक समाप्त कर दिए जाने के बाद अब जिले के नागरिकों को अपना काम कराने के लिए 100 किलोमीटर दूर दूसरे जिलों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

इस गंभीर जनसमस्या को लेकर *संजय कमल चंद जैन, विधायक प्रतिनिधि ए, हरदा* ने 10 जुलाई 2026 को माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र की प्रतिलिपि माननीय परिवहन मंत्री, कलेक्टर हरदा एवं जिला परिवहन अधिकारी को भी भेजी गई है।

समस्या की जड़ क्या है?

जैन के अनुसार हरदा एवं जिले की सभी तहसीलों में लगभग 2500 से अधिक व्यावसायिक वाहन पंजीकृत हैं। इसमें गुड्स ट्रक, यात्री बसें, स्कूल बसें और ऑटो रिक्शा शामिल हैं। मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार इन सभी वाहनों का फिटनेस प्रमाण-पत्र हर 5 माह में नवीनीकृत कराना अनिवार्य है।

पहले यह पूरी प्रक्रिया हरदा के जिला परिवहन कार्यालय में ही संपन्न हो जाती थी। लेकिन अब परिवहन विभाग द्वारा हरदा में फिटनेस जांच की सुविधा बंद कर दी गई है। अब वाहन मालिकों को मजबूरन होशंगाबाद, बैतूल, खंडवा और बुरहानपुर जैसे जिलों में जाना पड़ रहा है।

जनता पर 4 बड़ा असर

1. *आर्थिक मार*: एक वाहन को फिटनेस के लिए लगभग 200 KM का सफर करना पड़ रहा है। डीजल, टोल और चालक का खर्च जोड़कर प्रति वाहन 2500-3000 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

2. *समय और काम की हानि*: जो काम 1 दिन में होता था अब उसमें 2-3 दिन लग रहे हैं। इससे स्कूल बसें लेट, यात्री बसों की सेवाएं प्रभावित और माल ढुलाई ठप हो रही है।

3. *छात्रों और आम यात्रियों की परेशानी*: स्कूल बसों के समय पर फिटनेस न होने से बच्चों की पढ़ाई और यात्रियों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

4. *सरकार की नीति के विपरीत*: माननीय प्रधानमंत्री जी का “ऊर्जा बचत अभियान” और “ईज ऑफ लिविंग” का नारा तब खोखला लगता है जब एक छोटे से काम के लिए लोगों को 100 KM दूर धक्के खाने पड़ें।

क्या कहा विधायक प्रतिनिधि ने?

संजय जैन जी ने कहा कि “यह निर्णय न सिर्फ अव्यवहारिक है बल्कि जनविरोधी भी है। हरदा एक जिला मुख्यालय है और यहां 2500 से अधिक वाहनों के लिए बुनियादी सुविधा उपलब्ध न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे न केवल वाहन मालिक बल्कि आम जनता भी परेशान है।”

उन्होंने मुख्यमंत्री जी से मांग की है कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए हरदा जिला परिवहन कार्यालय में फिटनेस जांच की सुविधा को तत्काल पूर्ववत शुरू किया जाए। साथ ही तब तक के लिए अस्थायी व्यवस्था कर वाहन मालिकों को राहत दी जाए।

वाहन चालकों में आक्रोश

स्थानीय ऑटो चालक संघ और ट्रांसपोर्टरों ने भी इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि छोटे ऑटो चालकों के लिए बार-बार दूसरे जिले जाना संभव नहीं है। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर