हरदा – म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देश एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश व अध्यक्ष श्री अरविंद रघुवंशी के मार्गदर्शन में ‘अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस’ के अवसर पर शुक्रवार को एजुकेशन हब कोचिंग सेन्टर, हरदा में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में उपस्थित न्यायाधीश व सचिव श्री चन्द्रशेखर राठौर ने उपस्थित छात्र/छात्राओं को बताया कि विश्व भर में प्रत्येक वर्ष 17 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस मनाया जाता है। यह दिवस 17 जुलाई 1998 को रोम में ‘रोम संविधि’ को अपनाए जाने की स्मृति में मनाया जाता है, जिसके आधार पर अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसका मुख्यालय द हेग (नीदरलैंड) में स्थित है तथा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की जानकारी देते हुए बताया गया कि आईसीजे संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है। इसकी स्थापना 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अंतर्गत हुई तथा इसने 1946 से कार्य प्रारंभ किया। इसका मुख्यालय भी हेग, नीदरलैंड में स्थित है। आईसीजे का कार्य देशों के बीच उत्पन्न कानूनी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करना तथा संयुक्त राष्ट्र के अंगों और विशिष्ट एजेंसियों द्वारा पूछे गए विधिक प्रश्नों पर सलाहकारी मत देना। अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस का उद्देश्य न्याय, मानवाधिकार, विधि के शासन तथा सभी नागरिकों के समान न्याय की अवधारणा के प्रति जागरूक करना है। उन्होने बताया कि न्याय केवल न्यायपालिका तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को समय पर, सुलभ एवं समान न्याय उपलब्ध कराना एक लोकतांत्रिक व्यवस्था की आवश्यकता है। समाज के प्रत्येक वर्ग को अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों की जानकारी होना आवश्यक है, जिससे न्याय तक उनकी पहुंच सुनिश्चित हो सके। साथ ही विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों एवं नालसा व शासन की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। साथ ही पॉक्सो अधिनियम, 2012 की जानकारी देते हुए अवगत कराया गया कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का यौन शोषण गंभीर अपराध है।
जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री सौरभ कुमार दुबे द्वारा उपस्थित छात्र/छात्राओं को अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस के महत्व के बारे में जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि यह संकल्प लेने का अवसर है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति कानून के सम्मान करें, दूसरों के अधिकारों की रक्षा करे तथा सभी के लिए सुलभ, समान एवं निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका निभाए। एक न्यायपूर्ण समाज ही समावेशी विकास, सामाजिक विश्वास और लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक पहचान है। साथ ही उन्हें भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य, निःशुल्क विधिक सहायता, लोक अदालत, मध्यस्थता, पीड़ित प्रतिकर योजना, महिला एवं बाल अधिकार, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के अधिकारों सहित विभिन्न विधिक प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इसी क्रम में बताया गया कि पात्र व्यक्तियों को आर्थिक या अन्य कारणों से न्याय प्राप्त करने में कठिनाई होने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। कोई भी पात्र व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरदा या अन्य विधिक सेवा संस्थान में उपस्थित होकर, पत्र के माध्यम से, नालसा पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराकर, 15100 पर कॉल कर, विधिक सहायता आसानी से प्राप्त कर सकता है। शिविर में कोचिंग सेन्टर के संचालक श्री विक्रमादित्य टांक, पैरालीगल वॉलंटियर श्री सुरेन्द्र कौर, शिक्षकगण, छात्र/छात्राएं उपस्थित रहे।
चेक बाउंस के प्रकरणों के लिए विशेष लोक अदालत का आयोजन 18 जुलाई को
लोक अदालत के आयोजन हेतु खण्ड पीठ गठित
हरदा – कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, म.प्र. हाईकोर्ट और संरक्षक-प्रमुख, म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार 18 जुलाई शनिवार को धारा-138 परक्राम्य लिखित अधिनियम (नेगोशिएबल इन्स्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881) के अंतर्गत जिला न्यायालय, हरदा एवं तहसील न्यायालय टिमरनी व खिरकिया में लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष लोक अदालत में चेक अनादरण (चेक बाउंस) से संबंधित प्रकरणों का आपसी समझौते के आधार पर शीघ्र एवं सरल तरीके से निराकरण किया जावेगा। पक्षकारों को न्यायालयीन प्रक्रिया में लगने वाले समय और अनावश्यक व्यय से राहत मिलेगी तथा आपसी सहमति से विवाद का स्थायी समाधान प्राप्त होगा।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरदा ने संबंधित पक्षकारों, अधिवक्ताओं, बैंक प्रतिनिधियों और वित्तीय संस्थानों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में प्रकरणों का आपसी समझौते के माध्यम से निराकरण कराएं तथा लोक अदालत का लाभ उठाएं। उन्होने बताया कि प्रकरणों के निराकरण हेतु जिला मुख्यालय, हरदा पर दो एवं तहसील न्यायालय टिमरनी व खिरकिया हेतु एक-एक लोक अदालत खण्डपीठ गठित की गई है। न्यायालय द्वारा पक्षकारों के मध्य सुलह-प्रयास किये जाने हेतु नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए संबंधित न्यायालय या कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरदा में उपस्थित होकर संपर्क किया जा सकता हैं।

