पावनसिटी समाचार

शेख अफरोज हरदा 

जिले के विभिन्न सरकारी कार्यालयों में आम नागरिकों द्वारा दिए जाने वाले आवेदन, शिकायत पत्र एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की विधिवत पावती नहीं दिए जाने का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। मध्यप्रदेश शासन के स्पष्ट निर्देशों और प्रशासनिक नियमों के बावजूद कई कार्यालयों में आज भी आवेदन लेने के बाद केवल सील लगाकर या बिना तारीख और नाम अंकित किए दस्तावेज वापस लौटा दिए जाते हैं। इससे आमजन को बाद में यह साबित करने में परेशानी होती है कि उन्होंने संबंधित कार्यालय में आवेदन कब और किस अधिकारी या कर्मचारी को प्रस्तुत किया था।
दरअसल, मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय भोपाल द्वारा 27 जुलाई 2006 को जारी आदेश क्रमांक 1745/2318/06/1/9 में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि किसी भी सरकारी कार्यालय में प्रस्तुत दस्तावेज की पावती देते समय संबंधित कर्मचारी द्वारा हस्ताक्षर किए जाएं, प्राप्ति की पूरी तारीख अंकित की जाए तथा नाम, पदनाम एवं कार्यालय की स्पष्ट मुहर लगाई जाए। शासन ने यह भी कहा था कि अधूरी पावती को प्रमाणिक नहीं माना जाएगा और सभी विभागों को यह प्रक्रिया अनिवार्य रूप से अपनानी होगी।
इसके बावजूद हरदा जिले में कई कार्यालयों में इन नियमों के पालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं सूचना के अधिकार से जुड़े लोगों का आरोप है कि कई विभागों में आवेदन लेने के बाद उचित प्राप्ति नहीं दी जाती, जिससे बाद में फाइल गायब होने, आवेदन लंबित रखने या कार्रवाई टालने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। कई बार आवेदकों को यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि संबंधित अधिकारी मौजूद नहीं हैं, जबकि नियमों के अनुसार कार्यालय में आवेदन प्राप्त करना और उसकी पावती देना प्रशासनिक जिम्मेदारी मानी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दस्तावेज प्राप्ति की प्रक्रिया केवल औपचारिकता नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के सिद्धांतों के अनुसार किसी भी आवेदन की प्राप्ति का रिकॉर्ड नागरिक के अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक माना जाता है। वहीं सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की भावना भी यही कहती है कि सरकारी कार्यप्रणाली पारदर्शी और उत्तरदायी होनी चाहिए।
जानकार बताते हैं कि यदि किसी कार्यालय में आवेदन लेने से मना किया जाता है या सही पावती नहीं दी जाती, तो संबंधित व्यक्ति वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टर अथवा लोक सेवा गारंटी से जुड़े मंचों पर शिकायत कर सकता है। मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत भी कई सेवाओं में समय-सीमा निर्धारित की गई है और आवेदन की तारीख महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है। ऐसे में सही पावती नहीं मिलने से नागरिकों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
हरदा जिले में अब मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन सभी विभागों को पुनः निर्देश जारी करे और कार्यालयों में पावती रजिस्टर, डिजिटल रिसीविंग व्यवस्था एवं निगरानी प्रणाली लागू की जाए। लोगों का कहना है कि यदि शासन के पुराने आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाए तो भ्रष्टाचार, लापरवाही और फाइल दबाने जैसी शिकायतों में काफी कमी लाई जा सकती है।

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