खण्डवा-ग्राम गुड़ी निवासी 22 वर्षीय उमा पति कालिया को उसके परिजन मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल खण्डवा में गंभीर अवस्था में लेकर आये थे। जब महिला को प्रसव के बाद गांव से जिला अस्पताल लेकर आए थे, उस समय अधिक ब्लीडिंग हो जाने से उसका हीमोग्लोबिन मात्र 2 ग्राम रह गया था। डॉ. निशा पवार ने बताया कि उमा जब अस्पताल आई थी, तो उसके बचने की उम्मीद बहुत ही कम थी। जिला अस्पताल की टीम ने उमा को आई.सी.यू. में 10 दिन तक भर्ती किया। कुछ दिन उमा को वेंटिलेटर पर भी चिकित्सकों एवं स्टाफ की निगरानी में रखकर उपचार किया गया।
जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निशा पवार ने बताया कि उमा को खून की 7 बोतल चढ़ाई गई और 3 बोतल प्लेटलेट्स भी चढ़ाया। जिसकी वजह से उमा बाई का हीमोग्लोबिन स्तर बढ़ने लगा और उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। कुछ दिन पूर्व पूरी तरह से स्वस्थ होने पर उमा को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। उमा के पति कालिया ने बताया कि जब उमा को अस्पताल लेकर आए थे उस समय उसकी हालत बहुत गंभीर थी, पर जिला अस्पताल के चिकित्सकों की टीम के विशेष प्रयासों से उमा की जान बच गई। कालिया ने बताया कि जिला अस्पताल में पूरा उपचार निःशुल्क हुआ। इसके लिए उमा और उसके परिजन सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल, डॉ. निशा पवार, एचडीयू की इंचार्ज अंजलि काजले, खतीजा सहित पूरी टीम का आभार व्यक्त करते हैं।

