*“करोड़ों की योजना कागजों में अटकी… जिम्मेदारी तय कब होगी?”*

हरदा/टिमरनी/खिरकिया।

ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के अंतर्गत जनपद पंचायत टिमरनी एवं खिरकिया में प्रस्तावित नवीन जनपद भवनों का निर्माण कार्य लंबे समय से अटका हुआ है, जिससे अब मामला गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इन भवनों के लिए ठेकेदार से अनुबंध हुए चार से पांच माह बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य की शुरुआत तक नहीं हो पाई है।

स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों में इसको लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि समय पर कार्य शुरू न होने से विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और शासन को आर्थिक नुकसान होने की आशंका भी बढ़ रही है।

इसी बीच मामले ने नया मोड़ तब ले लिया जब संबंधित ठेकेदार द्वारा अनुबंध निरस्त करने के लिए विभाग को पत्र लिखे जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक ठेकेदार का आरोप है कि उसे अब तक निर्माण कार्य के लिए आवश्यक स्थल (जगह) उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। इसी कारण आज ठेकेदार ने औपचारिक रूप से विभाग को अनुबंध समाप्त करने का अनुरोध किया है।

इसके साथ ही निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतें भी इस परियोजना पर असर डाल रही हैं। टेंडर के समय जो दरें निर्धारित थीं, वर्तमान में उनमें उल्लेखनीय वृद्धि हो चुकी है, जिससे पुराने रेट पर कार्य करना ठेकेदार के लिए आर्थिक रूप से नुकसानदायक माना जा रहा है।

विभागीय स्तर पर इस पूरे मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेष रूप से विभाग में पदस्थ कार्यपालन यंत्री (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) निशी बैस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह माना जा रहा है कि समन्वय और निगरानी के अभाव में परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई।

वहीं, विभाग के अधीनस्थ उप यंत्रियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि समय रहते आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती गई और अब मामला अनुबंध निरस्तीकरण तक पहुंच गया है।

फिलहाल, विभाग की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस स्थिति को किस तरह संभालता है और क्या जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा।

स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि विकास कार्यों में हो रही देरी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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