पावनसिटी खण्डवा
खण्डवा- मध्य प्रदेश सरकार ने “कृषक कल्याण” को हमेशा से ही अपनी सर्वाेच्च प्राथमिकता माना है। इसीलिए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने दृष्टिकोण में स्पष्ट किया है कि “किसान ही राष्ट्र की रीढ़ हैं, और कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण तथा किसानों की आय में वृद्धि ही आत्मनिर्भर भारत का आधार है।” इसी राष्ट्रीय संकल्पना को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने कृषि को विकास की धुरी बनाते हुए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।
मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि आधारित है। राज्य के उच्च सकल मूल्य वर्धन में कृषि का योगदान वर्ष 2011-12 में 30 प्रतिशत था, जो कि वर्ष 2024-25 में बढ़कर 41 प्रतिशत हो गया है। प्रदेश के सिंचित क्षेत्र में वर्ष 2015-16 से 2024-25 के बीच 46 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सिंचाई क्षेत्र में निवेश वृद्धि के परिणामस्वरूप सकल बोए गये क्षेत्र के साथ-साथ, फसल की उत्पादकता में वृद्धि हुई है। दृष्टिपत्र वर्ष-2047 में एक ऐसे मध्यप्रदेश की कल्पना की गई है, जहाँ एक ऐसा अत्याधुनिक नवाचार से चलित, सतत और समावेशी आर्थिक प्रगति का समृद्ध प्रदेश हो; एक ऐसा “संपन्न मध्यप्रदेश” जहाँ कृषि उत्पादन और प्रसंस्करण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिले; एक “सुखद मध्यप्रदेश” जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ कृषि आधारित रोजगार अवसरों का विस्तार हो; और एक “सांस्कृतिक मध्यप्रदेश” जहाँ हमारी पारंपरिक खेती, प्राकृतिक कृषि और देशी पशुपालन हमारी पहचान को और मजबूत करें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कई अवसरों पर कहा है कि “कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की आत्मा है। राज्य की समृद्धि तभी संभव है जब हमारे कृषक समृद्ध हो। इसी दृष्टि से वित्तीय वर्ष 2026-27 का “कृषि बजट” तैयार किया गया है, जो उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, आदान व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण, उपज के बेहतर मूल्य की सुनिश्चितता तथा कृषकों के लिए सुरक्षा चक्र की स्थापना जैसे 4 प्रमुख फोकस क्षेत्रों पर केंद्रित है।
उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि
प्रदेश सरकार ने सिंचाई व्यवस्था को विस्तार देने के लिए नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, जल संसाधन विभाग तथा अन्य विभागों के अंतर्गत किये जा रहे भू-संरक्षण कार्यों में व्यापक निवेश किया है। सिंचाई के लिए विद्युत आपूर्ति का निश्चित समय, कृषि फीडर एवं नवीन ट्रांसफार्मर स्थापना, सौर ऊर्जा पम्पों का प्रावधान तथा लघु सिंचाई उपकरणों की उपलब्धता से कृषकों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहूलियत बनी है। खेत से गाँव और गाँव से बाज़ार का मार्ग सुगम होने से कृषि उपज को बेहतर दाम प्राप्त होते हैं। इसलिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, मुख्यमंत्री मजरा टोला सड़क योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में पुलों का निर्माण, अन्य विभागों द्वारा निर्मित सड़कें, विपणन व्यवस्था सुदृढ़ कर रही हैं।
प्रदेश में परंपरागत एवं आधुनिक कृषि का सराहनीय सामंजस्य स्थापित हो रहा है। एक ओर मध्य प्रदेश “एग्री स्टेक” क्रियान्वयित करने वाला अग्रणी राज्य है, वहीं दूसरी ओर रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बिना, गोबर, गौमूत्र जैसे स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहित किया जा रहा है। “एग्री स्टेक” के अंतर्गत एकीकृत डेटाबेस तैयार किया गया है जिसमें आधार से जुड़ी डिजिटल आईडी, भू-अभिलेख, फसल की जानकारी और बीमा विवरण को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं को पारदर्शी बनाना, ऋण तक आसान पहुंच और स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देना है। उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि संबद्ध गतिविधियों हेतु वर्ष 2026-27 हेतु राशि रू 28,158 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
*आदान व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण*
मध्य प्रदेश में एक मजबूत कृषि वित्त प्रणाली है, जहां 2024-25 में कुल ऋणों में कृषि ऋण का हिस्सा 30 प्रतिशत है, जो कि राष्ट्रीय औसत से अधिक है। राज्य में लगभग 74 लाख किसान क्रेडिट कार्ड, पशुपालन एवं मछुआ क्रेडिट कार्ड पर शून्य ब्याज दर पर दी जा रही अल्पकालिक ऋण सुविधा एक क्रांतिकारी कदम है। सहकारिता एवं अन्य बैंक के माध्यम से दिए जा रहे अन्य कृषि आदान जैसे खाद, बीज एवं उन्नत कृषि उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु अग्रिम भण्डारण तथा हाइब्रिड बीज वितरण की व्यवस्था की गई है।
*उपज के बेहतर मूल्य की सुनिश्चितता*
कृषि आय में वृद्धि के लिए उपज को सही समय एवं सही दाम आधारित विपणन सुविधा उपलब्ध कराना अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदेश में स्थापित सार्वजनिक उपार्जन प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि किसानों को बाजार तक आसानी से पहुंच मिले और वे बाजार की अनिश्चितताओं से सुरक्षित रहें। वर्ष 2024-25 रबी सीजन में, प्रदेश में लगभग 48.38 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की खरीद हुई। गेहूँ के अलावा धान, सोयाबीन, कोदो-कुटकी, चना, उड़द एवं मसूर जैसी फसलों के उपार्जन हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं। भावांतर योजना, बोनस राशि, मंडियों में सुविधाओं का विस्तार तथा “फार्म गेट” पोर्टल जैसी व्यवस्थाएँ कृषकों को बाजार से जोड़ने में सहायक होंगी। खाद्य प्रसंस्करण एवं कृषि आधारित मार्केट प्लेस से मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा। राज्य में खाद्य प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाने के लिये बुनियादी ढांचे, परिवहन, गोदाम और कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था को निरंतर सुदृढ किया जा रहा है।
*कृषकों के लिए सुरक्षा चक्र की स्थापना*
पिछले कुछ वर्षों में माननीय प्रधानमंत्रीजी के नेतृत्व में हमारे देश के कृषि सेक्टर में व्यापक परिवर्तन आए हैं जो “बीज से बाजार तक की फिलॉसफी” पर आधारित हैं। किसान, मछुआरे और पशुपालक हमारी कृषि की वृद्धि गाथा में महत्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं। कृषकों को आय सुरक्षा एवं जोखिम प्रबंधन हेतु प्रधानमंत्री कृषक सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, फसल बीमा योजना तथा एसडीआरएफ के अंतर्गत राहत राशि का प्रावधान किया गया है। वन्य जीवों द्वारा फसल क्षति की स्थिति में भी राहत राशि उपलब्ध कराई जाएगी। यह सुरक्षा चक्र कृषकों को आत्मविश्वास प्रदान करेगा। यह बजट केवल वार्षिक प्रावधान नहीं है, बल्कि “समृद्ध मध्यप्रदेश/2047” दृष्टि पत्र की भावना से प्रेरित एक दीर्घकालिक रोडमैप का हिस्सा है। इस विज़न में कृषि को राज्य की समग्र प्रगति का आधार स्तंभ माना गया है। कृषि बजट मध्यप्रदेश को कृषि के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के मुख्यमंत्रीजी के संकल्प का प्रतिविंब है।

