पावनसिटी हरदा

 संपादक- अशफाक अली
हरदा- उपसंचालक कृषि  जे.एल. कास्दे ने किसानों से अपील की है कि नरवाई जलाने से मित्र कीट नष्ट हो जाते है, भूमि में आग लगाने से जैव विविधता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, सूक्ष्मजीव जलकर नष्ट हो जाते हैं। उन्होने बताया कि ऊपरी परत से ही पौधों के लिए अत्यावश्यक पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं किंतु आग के संपर्क में आने से जलकर नष्ट हो जाते हैं। इससे भूमि कठोर होती है, एवं भूमि में जलधारण क्षमता काम हो जाती है, जिससे फसले जल्दी सूखती है, वातावरण के तापक्रम में वृद्धि होती है, धरती गर्म होती है एवं कार्बन नाइट्रोजन अनुपात में संतुलन बिगड़ जाता है, केंचुए कम हो जाते हैं, जिससे भूमि में वायु संचार में कमी आती है।
किसानों को सलाह दी गई है कि नरवाई समाप्त करने के लिये विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्र जैसे कंबाइन हार्वेस्टर, भूसा बनाने की मशीन, रोटावेटर से जुताई अथवा पटा चला कर कल्टीवेटर से जुताई, हैप्पी सीडर तथा जीरो टिलेज से खड़ी नरवाई में गेहूं, मूंग और उड़द जैसी फसलें लगाई जा सकती है। इसके साथ ही बेस्ट डीकंपोजर का उपयोग कर नरवाई को भूमि में जैविक खाद में बदला जा सकता है। नरवाई समाप्त करने हेतु मदर कलचर की और जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र हरदा से संपर्क किया जा सकता है।

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