पावनसिटी टिमरनी हरदा
बृजेश रिछारिया संवाददाता टिमरनी
टिमरनी- नगर परिषद टिमरनी द्वारा रहटगांव रोड़ पर वन विभाग भूमि की सीमा से लगे हाईवे सड़क किनारे छोटी छोटी गुमटीयों पर फल एवं सब्जीयों का व्यापार कर रहे व्यावसायियों को गत दिवस नगर परिषद द्वारा 1 लाख रूपये जमा करने एवं 1100 रूपये प्रतिमाह किराये देने हेतु नोटिस दिया गया था चूंकि सभी छोटे व्यावसायी हैं एवं उनकी आर्थिक स्थिति इतनी बड़ी राशि जमा करने की नहीं है। परतु नगर परिषद ने बार बार नोटिस देकर राशि जमा करने के लिए दबाब बना रही थी एवं जगह से बेदखल करने की धमकी नगर परिषद द्वारा दी जा रही थी। जिससे आहत होकर फल सब्जी विक्रेताओं ने माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में नगर परिषद के विरूद्ध याचिका दायर की थी। रीट पिटीशन क्रमाक 7036/2026 के तहत माननीय उच्च न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए दिनांक 27 फरवरी 2026 को अंतरिम आदेश पारित करते हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी को निर्देशित किया कि नगर परिषद पारित सकल्प दिनांक से 1100 रूपये प्रतिमाह के हिसाब से किराया जमा करें एवं व्यापारीयों द्वारा नगर परिषद को बाजार टेक्स के रूप में दुकानदारों द्वारा 20 रूपये प्रतिदिन जो दिया जाता है। उस राशि को भी निधारित किराये की राशि में समायोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही नगर परिषद को आदेशित करते हुए व्यापारीयों दुकानदारों से सिर्फ किराया वसूली करने के लिए ही आदेशित किया गया है। इसके अलावा किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं जमा कराया जावे। इसी आदेश के तहत सभी दुकानदार आवेदन के साथ किराये की राशि जमा करने हेतु नगर परिषद कार्यालय में दिनांक 2 मार्च 2026 को पहुंचे थे परंतु मुख्य नगर पालिका आधिकारी ने उनसे न मिलते हुए न्यायालय का आदेश मानने से इंकार कर दिया। दुकानदारों द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति के साथ प्रतिमाह किराये की राशि जमा करने के लिए आवेदन के साथ पहुंचे थे। परंतु अधिकारी द्वारा मुलाकात नहीं करने पर सभी 20 दुकानदारों द्वारा कार्यालय की आवक जावक शाखा में आवेदन देकर रिसीव ली गई।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सीएमओ की कार्यप्रणाली पर उठाये सवाल
इस संबंध में फल सब्जी विक्रेताओं ने पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष एवं नगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुभाष जायसवाल से चर्चा की तो वे भी व्यापारीयों के समर्थन एवं उच्च न्यायालय के आदेश को लेकर नगर परिषद कार्यालय पहुंचे परंतु मुख्य नगर पालिका अधिकारी टाला मटौली करते हुए अपने चेंबर में ही दरवाजा बंद कर बैठे रहे किन्तु बाहर खड़े दुकानदार व्यापारीयों तथा कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने नहीं आये जिससे सीएमओ की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। क्या वह जनता के हितों के लिए काम कर रहे हैं या नेताओं की चापलूसी में लग गए हैं जो उच्च न्यायालय के आदेश की आवहेलना कर रहें है।

