पावनसिटी हरदा
कृषि विभाग टिमरनी द्वारा ग्रामों में नरवाई प्रबंधन एवं खेतों की आग से सुरक्षा अभियान चला कर चौपाल के माध्यम से कृषकों को जागरूक किया जा रहा है।
विकास खंड टिमरनी के समस्त कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा ग्राम में जाकर चौपाल के माध्यम से नरवाई ना जलाने की समझाइश दी जा रही है, एवं कृषकों को बताया जा रहा है कि हार्वेस्टर से कटाई के उपरांत भूसा मशीन से फसल अवशेषों को भूसे में परिवर्तित करे एवं आगामी जायद की फसल बुवाई के लिए सुपर सीडर, हैप्पी सीडर ,का प्रयोग करे जिस क्षेत्र में दोनों यंत्र नहीं है वहां पर मल्चर यन्त्र या रोटावेटर यंत्र से नरवाई प्रबंधन के उपरांत ही जायद फसल की बुवाई करें, नरवाई न जलाने के फायदे भी कृषि विभाग के कृषि विस्तार अधिकारियों द्वार कृषकों से साझा किये जा रहे है
1. सूक्ष्म जीवो की सुरक्षा
2. मृदा हार्ड नहीं होती
3. मृदा में उपस्थित पोषक तत्वों का ह्रास नहीं होता
4. फसल के वायु संचार सुचारू रूप से होता है
5. उर्वरक उपयोग क्षमता में वृद्धि होती है।
6. पर्यावरण प्रदूषित होने से बचता है ।
7. वायुमंडल के तापमान में वृद्धि नहीं होती
8. आग से होने वाली धन जन हानि से सुरक्षा
9. नरवाई ना जलाने के कारण कृषकों को 6-7 हजार रु का अप्रत्यक्ष लाभ
इसी तारतम्य में उपसंचालक कृषि द्वारा चल रही चौपाल को संबोधित किया एवं कृषकों से वाद संवाद कर कृषकों की समस्या सुनी एवं कृषकों को नरवाई न जलाने संबंधित शपथ दिलाई।
जायद में मूंग का विकल्प
उपसंचाल कृषि जवाहर लाल कास्दे द्वारा कृषकों को मूंग के विकल्प के रूप में उड़द, मूंगफली लगाने की सलाह दी जो कि विभाग के माध्यम से योजना के तहत कृषकों को वितरण की जाएगी, उपसंचाल कृषि द्वारा बताया गया कि विभाग के कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर एमपी किसान पोर्टल पर पंजीयन प्रक्रिया के माध्यम से उक्त बीज प्राप्त किया जा सकता है इच्छुक कृषक विभाग से संपर्क कर योजना का लाभ ले सकते है।

