Gazal : हूं मैं एक ख्वाव जिसे तुम अपनी पलकों में छुपाकेे रखना…
हूं मैं एक ख्वाव जिसे तुम अपनी पलकों में छुपाकेे रखना, मोतियों सा बिखरना हैं मेरी आदत में सुमार, तुम…
Gazal : हां खो दिया बस खो दिया…
सितम ये हम पे बहारों ने किया, अरमानों का गुलशन उजड़ गया, फासलों ने ये हम से कहा, हां खो…
Gazal : जोड़ी थी जिससे हमने अपनी खुशियां…
जोड़ी थी जिससे हमने अपनी खुशियां, वो बागे बहारा उजड़ गया… कोई रंग बाकी न रहा हर रंग हाथों से…
