पावनसिटी समाचार  खंडवा
खण्डवा – कलेक्टर  ऋषव गुप्ता ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में उपस्थित महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपसी समन्वय से यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक अतिकुपोषित बच्चा पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती हो। उन्होंने कहा कि पोषण पुनर्वास केंद्र का कोई भी पलंग खाली ना रहे, यह प्रयास किया जाए। बैठक में अपर कलेक्टर श्रीमती सृष्टि देशमुख गौड़ा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर ओपी जुगतावत, जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल, मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. रंजीत बड़ोले, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती रत्ना शर्मा सहित स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे।
कलेक्टर  गुप्ता ने स्वास्थ्य विभाग के सभी पैरामीटर्स में खालवा विकासखंड की प्रगति सबसे खराब पाए जाने पर नाराजगी प्रगट की और विकासखंड चिकित्सा अधिकारी को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने सिंगोट के पोषण पुनर्वास केंद्र संबंधी जानकारी पोर्टल पर अपडेट ना करने और बच्चों के पोषण स्तर में उल्लेखनीय सुधार न आने पर वहां के मेडिकल ऑफिसर और पोषण प्रशिक्षक का एक-एक माह का वेतन काटने के निर्देश भी दिए। उन्होंने एनीमिक गर्भवती महिलाओं के मामले में लापरवाही बरतने पर पंधाना के विकासखण्ड चिकित्सा अधिकारी के विरूद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने के भी निर्देश दिए।
कलेक्टर श्री गुप्ता ने बैठक में निर्देश दिए कि पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती प्रत्येक बच्चे को उसकी मां के साथ निर्धारित कुल 14 दिन की अवधि तक रखा जाए। उन्होंने कहा कि भर्ती बच्चों की मां को 14 दिन की मजदूरी का भुगतान समय पर किया जाए, और डिस्चार्ज करते समय उसे बच्चों के पोषण आहार के संबंध में मार्गदर्शन दिया जाए। साथ ही बच्चे की मां को निर्धारित मात्रा में पौष्टिक आहार दें, ताकि वह घर पर भी बच्चे को नियमित रूप से पौष्टिक आहार देती रहे और बच्चे के पोषण स्तर में लगातार सुधार होता रहे।
कलेक्टर  गुप्ता ने सभी विकासखंड चिकित्सा अधिकारियों और महिला बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के पोषण पुनर्वास केन्द्रों का संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने बैठक में कहा कि जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दें और मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए हर संभव प्रयास करें। कलेक्टर श्री गुप्ता ने बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं सभी विकासखंड चिकित्सा अधिकारियों से कहा कि प्रसव के दौरान महिला या शिशु की मृत्यु के मामले को गंभीरता से लिया जाएगा तथा ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार डॉक्टर्स व स्वास्थ्य कर्मियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी। अपर कलेक्टर श्रीमती सृष्टि देशमुख गौड़ा ने बैठक में पोषण पुनर्वास केंद्र के उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए कि कुपोषित बच्चों को भर्ती अवधि में 14 दिनों तक सामान्य भोजन के स्थान पर विशेष रूप से पौष्टिक आहार युक्त भोजन दिया जाए। उन्होंने कहा कि राजमा, पालक, बथुआ की सब्जी, ज्वार, बाजरे और मक्के युक्त आटे की रोटी तथा गुड़, चने और मूंगफली की चिक्की तथा रागी के बिस्कुट बच्चों के लिए पौष्टिक और स्वादिष्ट होते हैं, इनके सेवन से बच्चों के पोषण स्तर में शीघ्रता से सुधार होता है।
कलेक्टर श्री गुप्ता ने बैठक में निर्देश दिए कि 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वृद्धजनों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष्मान योजना की पात्रता रखने वाले परिवारों के सभी सदस्यों के कार्ड बनवाये जाएं ताकि वे बड़े प्राइवेट अस्पतालों में अपना बेहतर इलाज करा सकें। कलेक्टर  गुप्ता ने दूरस्थ क्षेत्र के मरीजों को “टेली कंसलटेंसी” और “ई-संजीवनी” सुविधा का लाभ दिलाने के लिए भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ओ.पी. जुगतावत को निर्देश दिए। बैठक में उन्होंने मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम, कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम, क्षय रोग उन्मूलन, राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम, अंधत्व निवारण कार्यक्रम कार्यक्रम सहित सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की।